गोरखपुर, जेएनएन। एक एकड़ की तलैया होगी और उसके बीच बज्रासन मुद्रा में विराजमान होगी तलैया में जल के मूल स्रोत गुरु गोरक्षनाथ की 12 फीट की कांस्य प्रतिमा। लोगों को उनके दाहिने अंगूठे से पानी निकलने का अहसास भी होगा। यह अहसास न केवल लोगों को हर्षित करेगा बल्कि नाथ पंथ के प्रति गहरी आस्था को भी और पुख्ता करेगा। यह दृश्य होगा गोरखपुर व संत कबीर नगर की सीमा पर मौजूद कसरवल गांव के कबीर धूनी और गोरख तलैया परिसर का।

चार संतों का मिलन केंद्र है यह स्‍थान

गुरु गोरक्षनाथ, गुरु नानक, संत रविदास और संत कबीर का मिलन केंद्र माने जाने वाले इस आध्यात्मिक स्थल को पर्यटन केंद्र के विकसित करने का कार्य जोरशोर से चल रहा है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले इस कार्य को साल अंत तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य है। 

मान्यता है कि करीब 600 वर्ष पहले इस स्थान पर पड़े अकाल के दौरान जल संकट को दूर करने के लिए गुरु गोरक्षनाथ ने अपने अंगूठे से जमीन को दबाया तो वहां इतना पानी निकला कि एक तलैया तैयार हो गई। बाद में वह तलैया गोरख तलैया के नाम से मशहूर हो गई। समय के साथ तलैया का स्वरूप छोटा होता गया।

पर्यटन केंद्र के रूप में हो रहा विकसित

दो दशक पहले जब गोरखपुर-लखनऊ फोर लेन का निर्माण हुआ तो तलैया विलुप्तप्राय हो गई। हालांकि पास में ही कबीर धूनी का अस्तित्व बरकरार रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब प्रदेश का नेतृत्व संभाला तो अन्य आध्यात्मिक स्थल के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण स्थान को भी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनी। गोरख तलैया की योजना लोगों की आस्था को ध्यान में रखकर तैयार की गई।

पहले थी यह योजना

चार एकड़ क्षेत्र में पौने पांच करोड़ रुपये की लागत से बीते वर्ष निर्माण कार्य शुरू किया गया। पूर्व निर्धारित योजना के तहत तीन मीटर गहरी तलैया में करीब 12 फीट की गुरु गोरक्षनाथ की सीमेंट की प्रतिमा स्थापित होनी थी लेकिन पिछले दिनों प्रतिमा के प्रारूप में परिवर्तन करके कांसे की प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश शासन की ओर से पर्यटन विभाग को मिला। निर्देश के बाद अब गुरु गोरक्षनाथ की कांसे की प्रतिमा तैयार कराई जा रही है।

गोरख तलैया और कबीर धूनी पर यह होगा इंतजाम

चारो ओर पाथ-वे बनाया जाएगा। गुरु गोरक्षनाथ का आशीर्वाद उनके चरण तक पहुंचकर लिया जा सके, इसके लिए कबीर धूनी से प्रतिमा स्थल तक तलैया के बीच ब्रिज बनाया जाएगा। टूरिस्ट सेल्टर, यात्री शेड, शौचालय, पेयजल पोस्ट, प्रकाश आदि का समुचित इंतजाम होगा।

स्थल के विषय में यह है मान्यता

कबीर धूनी के पुजारी रामशरण दास ने बताया कि 600 साल पहले इस क्षेत्र में सूखा पड़ा तो स्थानीय लोगों ने भंडारे का आयोजन किया। भंडारे में गुरु गोरक्षनाथ और कबीरदास के अलावा संत रविदास समेत बहुत से संत आए। जनश्रुतियों के अनुसार गुरु नानक ने भी हिस्सा लिया था। हालांकि नानक और कबीर का काल मेल न खाने से इस मान्यता को लोगों का उत्साह ही कहा जा सकता है। बताते हैं कि भंडारे के दौरान पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए गुरु गोरक्षनाथ ने अपने पैर के अंगूठे से जमीन को दबाकर पानी निकाल दिया। कबीर ने धूनी रमा कर वर्षा कराकर सूखे से निजात दिलाई और वह स्थल कबीर धूनी बन गया।

31 दिसंबर तक कार्य पूरा होने की उम्‍मीद

क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवींद्र कुमार मिश्र का कहना है कि गोरख तलैया में अब सीमेंट की जगह गुरु गोरक्षनाथ की कांस्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है। चार एकड़ में विकसित किए जा रहे इस पर्यटन केंद्र का कार्य तेजी से चल रहा है। पूरी कोशिश है कि 31 दिसंबर तक कार्य पूरा कराकर लोकार्पण करा दिया जाए।

Posted By: Satish Shukla

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