गोरखपुर, जेएनएन। रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में होने वाले अपराध रोकने के लिए जीआरपी ने क्राइम मैपिंग कराने का फैसला किया है। इस योजना के तहत जीआरपी थाने और चौकियों के चार किलोमीटर के दायरे में निजी व सरकारी भवनों तथा प्रतिष्ठानों पर लगे सीसी टीवी कैमरों की डिटेल जुटाई जा रही है। साथ ही जिस भवन में कैमरा लगा उसके मालिक का नाम, पते व मोबाइल नंबर का रिकार्ड भी तैयार किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन परिसर में किसी भी तरह की वारदात होने के बाद इन कैमरों की मदद से आरोपित की पहचान आसानी से हो जाएगी। जीआरपी थाने के चार किमी दायरे में सीसी कैमरों की जुटाई जा रही डिटेल

गूगल मैप पर फीड की जा रही सीसी कैमरों की लोकेशन

सीसी कैमरों की गुगल मैपिंग करने के लिए गोरखपुर जीआरपी अनुभाग के हर थाने के तीन-तीन सिपाहियों को विशेष प्रशिक्षण दिलाया गया है। स्टेशन के चार किमी के दायरे में लगे कैमरों को चिह्नित करने के साथ पहचान के लिए सभी को अलग-अलग नंबर दिया गया है।  रेलवे परिसर में होने अपराध रोकने और वारदातों को अंजाम देने वाले अपराधियों पर काबू पाने के लिए एसपी रेलवे पुष्पांजलि देवी ने क्राइम मैपिंग की योजना तैयार की है। क्राइम मैपिंग के बाद सीसी कैमरों की मदद से अपराधियों को पहचाना और बाद में उन्हें पकडऩा आसान हो जाएगा।

रेलवे स्टेशन परिसर में होते हैं इस तरह के अपराध

ट्रेन, प्लेटफार्म और सर्कुलेटिंग एरिया में यात्रियों के सामान की चोरी

वाहनों की चोरी

बाहर से चोरी कर लाए गए वाहनों को स्टेशन परिसर के स्टेंड में जमा करना

स्टेशन के ट्रेन से रवाना होने के बाद खिड़की के पास बैठे यात्रियों से छिनैती

आउटर पर ट्रेन की गति धीमी होने पर यात्रियों से छिनैती

अपराधियों की पहचान करने में सीसी कैमरों की फुटेज काफी कारगर साबित होती है। इसीलिए क्राइम रोकने के लिए लिहाज से इसकी मैपिंग कराई जा रही है। थाने स्तर पर काम पूरा कर लिया गया है। पुलिस चौकी स्तर पर मैपिंग कराई जा रही है। - पुष्पांजलि देवी, एसपी रेलवे।

पांच साल में पांच गुना बढ़ा साइबर अपराध, चुनिंदा का हुआ पर्दाफाश

केस-एक : 17 नवंबर, 2019 को झंगहा के जंगल गौरी नंबर एक निवासी अंकुर शर्मा के खाते से साइबर अपराधियों ने 48 हजार रुपये निकाल लिए। अब तक उनका मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।

केस-दो : पांच सितंबर, 2019 को रुस्तमपुर उत्तरी के नहर रोड निवासी रमेश चंद्र राय के खाते से जालसाजों ने 12 हजार रुपये निकाल लिए। थाने व पुलिस अफसरों से शिकायत के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।

साइबर अपराधियों के आगे पुलिस ने घुटने टेक दिए हैं। जालसाजों को पकडऩा तो दूर मुकदमा दर्ज करने से भी पुलिस बचने लगी है। पुलिस की सुस्ती और बहानेबाजी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी रोजाना लोगों को जाल में फंसा ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि गुजरे पांच साल में साइबर अपराध में पांच गुने का इजाफा हो गया है। आनलाइन खरीदारी और ट्रांजेक्शन बढऩे के साथ साइबर क्राइम में भी इजाफा हो रहा है। लोगों में तकनीकी जानकारी के अभाव का फायदा उठाकर साइबर ठग उन्हें चूना लगा रहे हैं। पुलिस पहले तो मुकदमा दर्ज करने से बचती है, लेकिन दबाव में अगर यह करना भी पड़े तो पर्दाफाश करने की बजाय बहानेबाजी में जुट जा रही है।

पुलिस की चुनिंदा बहानेबाजी

आपने ही एटीएम पिन या ओटीपी बताया होगा।

नक्सली इलाकों में जाने की हमें इजाजत नहीं है।

दूसरे राज्यों की पुलिस हमारी मदद नहीं करती है।

जिस नंबर से ठगी हुई वह फर्जी आइडी पर लिया था।

जिस खाते में पैसा गया वह फर्जी नाम-पते पर था।

पांच साल में पांच गुना बढ़ी घटनाएं

वर्ष             दर्ज हुए केस

2019                288

2018                215

2017                188

2016                104

2015                45

अज्ञानता और लालच में फंसकर लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं। जागरूकता से ही साइबर अपराध को रोका जा सकता है, इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। मुकदमा दर्ज न करने का मामला गंभीर है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सुनील गुप्ता, एसएसपी 

Posted By: Pradeep Srivastava

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