UP में चकबंदी गांवों के किसानों को राहत, अब बिना फार्मर आईडी भी बेच सकेंगे गेहूं
सरकार ने गेहूं खरीद प्रक्रिया में किसानों को बड़ी राहत दी है। अब चकबंदी वाले गांवों के किसान भी बिना फार्मर आईडी के क्रय केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे।

गोरखपुर सहित कई जिलों से मिल रही किसानों की परेशानियों की सूचना पर शासन ने दी राहत। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
चकबंदी गांवों के किसान भी बेच सकेंगे गेहूं।
क्रय केंद्रों पर ही बनेगी फार्मर आईडी।
किसानों को मिलेगा न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ।
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- फार्मर आइडी बनाने की प्रक्रिया भी होगी आसान, क्रय केंद्रों पर ही आइडी बनवा सकेंगे किसान
जागरण संवाददाता, गोरखपुर: गेहूं खरीद को लेकर किसानों की बढ़ती परेशानियों के बीच सरकार ने राहत देने वाले कई अहम फैसले किए हैं। अब किसानों को फार्मर आईडी न होने पर भी क्रय केंद्र से लौटाया नहीं जाएगा, बल्कि वहीं उनकी आइडी बनाकर गेहूं की तौल सुनिश्चित की जाएगी। चकबंदी और सर्वे की प्रक्रिया से गुजर रहे गांवों के किसानों का भी गेहूं अब क्रय केंद्रों पर खरीदा जा सकेगा। इन गांवों में जमीन के रिकार्ड अपडेट न होने के कारण फार्मर रजिस्ट्रेशन कराना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में किसान एमएसपी पर गेहूं बेचने से वंचित हो रहे थे और मजबूरी में कम दाम पर बिचौलियों को फसल बेच रहे थे।
गोरखपुर सहित कई जिलों से चकबंदी प्रक्रियारत गांवों में बड़ी संख्या में किसानों के परेशान होने की शासन को सूचना मिल रही थी। इसका संज्ञान लेते हुए अब शासन ने स्पष्ट किया है कि चकबंदी वाले गांवों के किसानों को भी उनकी जमीन की सीमा तक, पहले से चली आ रही प्रक्रिया के आधार पर गेहूं बेचने की अनुमति दी जाएगी। यानी अब वे भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी फसल बेच सकेंगे और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा। जिले में 54 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है।
वहीं हाल ही में गेहूं खरीद के लिए फार्मर आइडी अनिवार्य किए जाने के बाद सामान्य गांवों के भी बड़ी संख्या में किसान दिक्कत में आ गए थे। जानकारी के अभाव में कई किसान अपनी आइडी बनवा नहीं सके, जिससे क्रय केंद्रों पर उनकी फसल नहीं खरीदी जा रही थी। इस स्थिति को देखते हुए अब हर क्रय केंद्र पर जनसेवा केंद्र (सीएससी) की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जहां किसान तुरंत पंजीकरण कराकर अपनी फार्मर आइडी बनवा सकेंगे।
नए निर्देशों के मुताबिक, कोई भी किसान सिर्फ इस वजह से वापस नहीं होगा कि उसके पास फार्मर आइडी नहीं है। केंद्र प्रभारी की जिम्मेदारी होगी कि वह मौके पर ही आइडी बनवाने की व्यवस्था कराए और उसके बाद गेहूं की तौल कराई जाए। इससे उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो अब तक प्रक्रिया की जटिलता के कारण परेशान थे। इस संबंध में गेहूं खरीद के प्रभारी व एडीएम (वित्त एवं राजस्व) विनीत सिंह की ओर से भी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि दिक्कतों के चलते कई किसान 2000 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल पर गेहूं बेचने को मजबूर थे। शासन के इन नए फैसलों से उम्मीद है कि गेहूं खरीद प्रक्रिया आसान होगी, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य मिल सके।
