गोरखपुर, उमेश पाठक। उद्यमियों में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा तो गोरखपुर में निवेश का माहौल बनने लगा। बाहर के उद्यमी यहां आने लगे तो स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को देश के बाहर भी बाजार मिलने लगा। गोरखपुर में तैयार होने वाले टेक्सटाइल सेक्टर के उत्पादों की विदेश में खूब मांग है। यहां से धागा व कपड़े का निर्यात किया जा रहा है। हर महीने 250 से 300 टन धागा तो तीन से चार लाख टन कपड़ा देश के बाहर भेजा जा रहा है। ये उत्पाद दक्षिण अफ्रीका, पेरू, इजिप्ट, तुर्की आदि देशों को भेजा जाता है। उद्यमियों के पास निर्यात के लिए बड़े पैमाने पर आर्डर आ रहा है लेकिन अपने घरेलू बाजार को बनाए रखने के लिए एक सीमा के बाद निर्यात करने से बच रहे हैं।

कोराना के बाद बदला सीन

कोरोना काल से पहले अधिकतर देशों में चीन का माल भेजा जाता था। कोरोना संक्रमण काल के दौरान चीन से लोगों का भरोसा उठ गया और भारत के उत्पादों की मांग बढ़ गई। धागा बनाने वाली गोरखपुर की बड़ी कंपनी अंकुर उद्योग लिमिटेड द्वारा करीब बीच में कई साल तक निर्यात बंद करना पड़ा था लेकिन कोरोना काल संक्रमण काल में बाहर से मांग आयी तो एक बार फिर निर्यात शुरू किया। कुल उत्पाद के 10 प्रतिशत से शुरू हुआ निर्यात इस समय 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस फैक्ट्री में हर महीने 1500 टन धागे का उत्पादन किया जाता है। प्रोसेसिंग हाउस वीएन डायर्स में हर महीने 10 लाख मीटर कपड़ा तैयार किया जाता है। इसमें से तीन से चार लाख मीटर कपड़ा दक्षिण अफ्रीकी देशों को भेज दिया जाता है। स्कूल खुलने के बाद स्थानीय स्तर पर भी यहां के कपड़े की खूब मांग है। गोरखपुर में फिलहाल टेरीकाट के कपड़े तैयार होते हैं। सहजनवा गीडा की महावीर जूट मिल में भी करीब 500 टन से अधिक धागा का उत्पादन किया जाता है। समय-समय पर यहां से भी माल बाहर भेजा जाता है।

हर साल निर्यात की जाती है पांच करोड़ सीरिंज

गोरखपुर में सीरिंज बनाने वाली कंपनी हाई टेक इंडिया लिमिटेड द्वारा हर वर्ष पांच करोड़ सीरिंज विदेश भेजती है। इसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपये है। कंपनी के लतीफ बताते हैं कि हर महीने गीडा की इस फैक्ट्री में सात से आठ करोड़ सीरिंज तैयार की जाती है। .5 मिली से लेकर 50 मिली तक के सीरिंज का निर्माण किया जाता है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान के दौरान यहां के सीरिंज की मांग और अधिक थी। लतीफ बताते हैं कि उनकी कंपनी देश की दूसरे बड़ी उत्पादक है। यहां से तंजानिया, नाइजीरिया, कुछ अन्य अफ्रीकी देशों, दुबई, ओमान, सउदी अरब सहित अन्य अरब देशों, ब्राजील, रूस, आयरलैंड, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, इराक, बेल्जियम, अजेंटीना आदि देशों को सीरिंज भेजी जाती है।

मेरी कंपनी में हर महीने करीब 1500 टन धागा तैयार किया जाता है। इसमें से 20 प्रतिशत का निर्यात होता है, शेष माल देश के अलग-अलग शहरों में भेजा जाता है। निर्यात बढ़ाने के लिए काफी मांग आ रही है लेकिन घरेलू बाजार की उपलब्धता को देखते हुए इससे अधिक निर्यात करने की योजना नहीं है। - निखिल जालान, अंकुर उद्योग लिमिटेड।

हर महीने करीब तीन से चार लाख मीटर कपड़ा देश के बाहर भेजा जाता है। अभी और मांग आ रही है लेकिन घरेलू बाजार को भी देखना है। इस समय यहां का बाजार भी अच्छा है। हमारे यहां हर महीने करीब 10 लाख मीटर कपड़ा का उत्पादन होता है। - विष्णु अजीत सरिया, वीएन डायर्स एवं अध्यक्ष चैंबर आफ इंडस्ट्रीज।

गोरखपुर में गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं का उत्पादन होता है। बड़े पैमाने पर निर्यात किया जा रहा है। कई नई औद्योगिक इकाईयां भी स्थापित होने जा रही हैं, जिससे रोजगार के साथ-साथ निर्यात भी बढ़ेगा। पड़ोसी देश नेपाल में भी कई उद्यमियों द्वारा निर्यात किया जाता है। - पवन अग्रवाल, सीईओ गीडा।

Edited By: Pradeep Srivastava