गोरक्षनगरी में माहौल मिला तो सारसों की संख्या हो गई आठ गुणा, तालाब और पोखरे दे रहे अनुकूल माहौल
गोरखपुर वन प्रभाग में सारसों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। वन विभाग द्वारा तालाबों और नदियों की सफाई कराने से पक्षियों को भोजन मिला। मुख्यमंत्री की पहल से 2021 में 128 सारस थे, जो 2025 में बढ़कर 879 हो गए। शिकारियों पर नियंत्रण से सारसों को सुरक्षित वातावरण मिला है।

एशियन ओपनबिल पक्षी को भी रास आ रहा क्षेत्र। जागरण
जितेन्द्र पाण्डेय, जागरण, गोरखपुर। गोरक्षनगरी की हवा और जंगल के बीच स्थित तालाब व नदियां पक्षियों को रास आने लगीं हैं। दूर-दराज से आने वाले पक्षी चार से पांच महीने इन जगहों पर अपना डेरा जमाते हैं। इनके ठहराव के लिए गोरखपुर वन प्रभाग क्षेत्र की 92 नदी, तालाब और पोखरों को विभाग साफ-सुथरा करा दिया है, जिससे पक्षियों को भोजन के रूप में पर्याप्त मछलियां मिल रहीं हैं।
इससे उनका कूनबा भी बढ़ रहा है। चार वर्ष की गिनती पर नजर डाले तो सारस की संख्या में आठ गुणा की वृद्धि हुई है। वहीं, इसी प्रजाति की प्रवासी पक्षी एशियन ओपनबिल की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर वर्ष 2021 में पहली बार वन विभाग ने वेटलैंड की गणना के साथ सारस की गणना कराया था। जिसमें वन प्रभाग क्षेत्र में सिर्फ 128 सारस मिले थे, इसमें 112 व्यस्क और 16 बच्चे शामिल थे। इसके बाद इनकी संख्या को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने वेटलैंड को चिह्नित कर उन्हें व्यवस्थित करने और शिकारियों पर लगाम लगाने का निर्देश दिया। जिसके बाद वन विभाग ने सभी नदी, तालाब और पोखोरों को सही कराया और वनकर्मियों को लगाकर शिकारियों पर निगरानी बढ़ा दी।
इससे शकारियों की संख्या न के बराब हो गई और सारस को सुरक्षित ठिकाना मिल गया। जिसका नतीजा रहा कि वर्ष 2022 में जब सारस की गणना हुई तो उनकी संख्या 187 पहुंची। वहीं वर्ष 2025 ग्रीष्मकालीन गणना में इनकी संख्या आठ गुणा बढ़कर 879 हो चुकी है। अभी शीतकालीन सत्र की गणना होनी है, जिसे वन विभाग दिसंबर में कराएगा।
परतावल, कैंपियरगंज व सहजनवा क्षेत्र में सबसे अधिक
वन विभाग के अनुसार गोरखपुर वन प्रभाग में कुल 11 रेंज हैं। इन रेंजों में कुछ खास क्षेत्र हैं, जो सारस के लिए उपयुक्त हैं। इन क्षेत्रों में हर दिन सुबह और शाम सारस अपने जोड़ों में दिखाई देते हैं। ऐसे स्थानों पर वन विभाग की टीम प्रतिदिन गश्त कर उनकी गणना और निगरानी करती है।
सबसे अधिक सारस परतावल रेंज में मिलते हैं। इसके बाद इनकी संख्या कैंपियरगंज और सहजनवा क्षेत्र में स्थित छोटे-छोटे तालाब, पोखरों और नदियों के किनारे मिलते हैं। इसके अलावा चिलुआताल में भी हर महीने सारस और ठंड के समय प्रवासी पक्षी डेरा डाले दिखते हैं।
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एक ही जगह रहने से गिनती में होती है आसानी
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि सारस पक्षी की खास बात यह है कि वह एक ही क्षेत्र में रहते हैं। अगर उन्हें सुरक्षा का अहसास हो जाता है तो उसी क्षेत्र में रहते हुए अपना घोंसला बनाकर प्रजनन करते हैं। इससे इनकी गिनती करने में भी आसानी होती है।
गणना के समय वनकर्मी सुबह और शाम दोनों समय एक जगह पर जाते हैं और जीपीएस सिस्टम से फोटोग्राफी करते हैं। उन्होंने कहा कि राजकीय पक्षी सारस की संख्या में हो रही लगातार वृद्धि गोरखपुर वन प्रभाग के लिए सुखद है। यहां की जलवायु और हवा उन्हें पसंद आ रही है। वर्ष में दो बार ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन सत्र में इनकी गणना होती है।

दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं ओपनबिल
एक वर्ष से डेरा जमाए एशियन ओपनबिल मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं। डीएफओ ने बताया कि यह सारस की प्रजाति का ही पक्षी है। इसका भी प्रमुख भोजन मछली है। तालाब, पोखरों और नदियों के आसपास रहना पसंद करते हैं। इनके चोंच के बीच का हिस्सा गोल आकार में ऊंचा होता है।

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