गोरखपुर में कोटेदार ने बेच दिया अनाज, 125 क्विंटल का हिसाब नहीं
गोरखपुर के मीरपुर गांव में एक कोटेदार ने लाभार्थियों का अक्टूबर और नवंबर का अनाज बाजार में बेच दिया, जिसके ...और पढ़ें

HighLights
गोरखपुर में कोटेदार ने लाभार्थियों का अनाज बाजार में बेचा।
छापेमारी में दुकान से लगभग 125 क्विंटल अनाज कम मिला।
कोटेदार का लाइसेंस निलंबित कर एफआईआर दर्ज की गई।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। जंगल कौड़िया ब्लाक के मीरपुर गांव के कोटेदार ने लाभार्थियों का अनाज बाजार में बेच दिया। अक्टूबर के साथ ही नवंबर का भी अनाज बेच दिया। गोपनीय सूचना पर जिला पूर्ति विभाग की टीम ने गुरुवार सुबह कोटे की दुकान पर छापा मारा तो लगभग 125 क्विंटल अनाज कम मिला। दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। देर रात चिलुआताल थाने में कोटेदार के खिलाफ एफआइआर दर्ज करा दी गई है।
वरिष्ठ पूर्ति निरीक्षक अरुण सिंह ने बताया कि शिकायत मिली थी कि मीरपुर के कोटेदार रामसेवक द्वारा ई-पास मशीन से संबद्ध वेइंग मशीन पर अन्त्योदय एवं पात्र गृहस्थी लाभार्थियों से अंगूठा लगवा कर कई महीनों से अनाज नहीं दिया गया है। संजीत कुमार गौतम, विनोद कुमार एवं संतोष कुमार वर्मा की संयुक्त टीम के साथ गुरुवार सुबह छापा मारा।
स्टाक रजिस्टर मांगा गया, किंतु विक्रेता द्वारा उपलब्ध नही कराया गया। विक्रेता ने कहा कि स्टाक रजिस्टर कहीं गायब हो गया है। भौतिक सत्यापन में दुकान में अनाज नहीं मिला। ई-पॉस मशीन के अनुसार निरीक्षण तिथि को विक्रेता की दुकान में 26.985 क्विंटल गेहूं तथा 99.075 क्विंटल चावल उपलब्ध रहना चाहिए था। माह नवम्बर 2026 में वितरण के लिए उपलब्ध कराई गई संपूर्ण मात्रा का दुरुपयोग विक्रेता द्वारा कर लिया गया है।
इसी प्रकार माह अक्टूबर 2026 में वितरण हेतु उपलब्ध कराई गई मात्रा में से भी अधिकांश मात्रा का दुरुपयोग कर लिया गया है, क्योंकि विक्रेता द्वारा उसकी दुकान पर संबद्ध कुल 392 कार्डों में से अक्टूबर 2026 के आवंटन के सापेक्ष गुरुवार को निरीक्षण के समय तक विक्रेता द्वारा मात्र 194 कार्डों पर ही वितरण किया गया था।
अब भी 198 कार्डधारक खाद्यान्न प्राप्त करने हेतु शेष हैं, लेकिन दुकान में अनाज की कोई मात्रा उपलब्ध नहीं है। जिससे ये 198 कार्डधारक भी माह अक्टूबर में विक्रेता की दुकान से खाद्यान्न प्राप्त होने से वंचित हो जाएंगे। दुकान में अनाज का स्टाक न पाये जाने के सम्बन्ध में विक्रेता रामसेवक से पूछताछ की गई तो उनके द्वारा कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।
मौके पर मौजूद 04 अन्त्योदय तथा 51 पात्र गृहस्थी कार्डधारकों द्वारा अपने बयान के माध्यम से बताया गया कि विक्रेता द्वारा उन्हें ई-पास मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद कई माह खाद्यान्न नहीं दिया गया है। इस प्रकार जांच में विक्रेता राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत आवंटित खाद्यान्न की कालाबाजारी में संलिप्त पाया गया है।
