गोरखपुर, दुर्गेश त्रिपाठी। शक्तिनगर के राधेश्याम सिंह गर्मी में पसीने से भीगे हैं। हाथ पंखा झलकर राहत पाने में जुटे हैं। ऐसा नहीं है कि राधेश्याम सिंह के पास पंखा, एसी नहीं है। कमरे में पंखा है और एसी भी लगी है लेकिन बिजली का बिल बढऩे की चिंता में वह गर्मी को सह रहे हैं।

राधेश्याम सिंह भले ही सुविधा संपन्न होने के बाद गर्मी बर्दाश्त कर रहे हैं लेकिन बिजली निगम के अफसरों, कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ ऐसा नहीं है। बिजली निगम में नौकरी है तो सिर्फ 650 रुपये में पूरे महीने एसी चलाइए। यानी एक बार एसी का स्विच आन हो गया तो ज्यादा बिल की चिंता में बंद करने की कोई हड़बड़ी ही नहीं होती।

मीटर भी नहीं, खूब जलाएं बिजली

बिजली निगम से जुड़े घरों में मीटर नहीं लगाया जाता। श्रेणी के अनुसार फिक्स चार्ज देना होता है। यानी कितनी भी बिजली जलाइए रुपये महीने में कम से कम ही देने पड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बिना मीटर वाले कनेक्शन पर बिजली का प्रति माह का फिक्स चार्जर 15 सौ से दो हजार रुपये है वहीं बिजली निगम के अधिशासी अभियंता हर महीने सिर्फ 1099 रुपये ही देते हैं। बिजलीकर्मियों को एलएलवी 10 श्रेणी के अंतर्गत कनेक्शन दिया जाता है।

डेढ़ टन की एसी का तकरीबन तीन हजार बिल

सामान्य उपभोक्ता यदि डेढ़ टन की एसी का इस्तेमाल करता है तो हर महीने उसका बिजली का बिल तकरीबन तीन हजार रुपये आता है। बिजली निगम के अफसर, कर्मचारी या पेंशनर को सिर्फ 650 रुपये देने पड़ते हैं। भले ही वह दो टन क्षमता की ही एसी क्यों न लगाएं। गंभीर बात यह है कि ज्यादातर कर्मचारी एसी लगाए हुए हैं लेकिन इसकी सूचना निगम को नहीं देते हैं। इससे फिक्स चार्ज में ही वह एसी भी चलाते हैं।

ऐसे देते हैं बिल

श्रेणी फिक्स चार्ज

चतुर्थ श्रेणी 425

टीजी टू 425

अवर अभियंता 832

सहायक अभियंता 1031

अधिशासी अभियंता 1099

सभी विभाग अपने कर्मचारियों को सुविधा देता है। इसी तरह बिजली निगम अपने कर्मचारियों को भी सुविधा देता है। बिजली हमें मुफ्त में नहीं मिलती, इसे रियायती दर पर दिया जाता है। यदि इस रियायत को भी खत्म करने की कोशिश की गई तो हम चुप नहीं बैठेंगे। - बृजेश त्रिपाठी, केंद्रीय अध्यक्ष, राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ।

Edited By: Pradeep Srivastava