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कंपनी ने खड़े किए हाथ तो दिलीप का हुनर आया रेलवे के काम, बायोटॉयलेट ठीक कर बचाए करोड़ों; मिला पुरस्कार

Published: Sun, 18 Jan 2026 08:26 PM (IST)

गोरखपुर रेलवे कारखाने के सीनियर सेक्शन इंजीनियर दिलीप कुमार गौतम ने ट्रेनों के खराब बायोटॉयलेट फ्लशिंग सिस्टम की समस्या का ...और पढ़ें

दिलीप ने अपने संसाधनों से 1200 से अधिक खराब सिलेंडर को फिर से ट्रेन में लगाया।

दिलीप ने अपने संसाधनों से 1200 से अधिक खराब सिलेंडर को फिर से ट्रेन में लगाया।

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। ट्रेनों के बायोटॉयलेट के आधुनिक फ्लश जवाब देने लगे। टॉयलेट की सफाई बाधित हुई और दुर्गंध से परेशान यात्रियों की शिकायतें बढ़ने लगीं। संबंधित कंपनी ने 'प्रेशराइजिंग फ्लशिंग सिस्टम' के खराब उपकरण (सिलेंडर व पिस्टन) बाजार में न होने की बात कहकर हाथ खड़े किए। कारखाना के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) दिलीप कुमार गौतम ने इस चुनौती को स्वीकारा।

कारखाना में ही अपने संसाधनों से इन उपकरणों को तैयार कर डाला। कारखना में कंडम होकर जमा हुए 1200 से अधिक खराब सिलेंडर फिर से ट्रेनों में लग गए। इससे टॉयलेट से उठने वाली दुर्गंध गायब हुई, तो वहीं पानी की खपत भी कम हो गई। साथ ही 4.39 करोड़ रुपये के रेल राजस्व भी बचा।

दिलीप कुमार गौतम बताते हैं कि गोरखधाम, कुशीनगर और कोचीन समेत गोरखपुर से बनकर चलने वाली ट्रेनों के लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोचों में बायोटॉयलेट ही लगते हैं। बायोटॉयलेट में प्रेशराइजिंग फ्लशिंग सिस्टम लगते हैं।

इस सिस्टम के चलते बायोटॉयलेट में फ्लश दबाने पर सिर्फ डेढ़ लीटर पानी ही खर्च होता है और टॉयलेट भी साफ हो जाता है। लेकिन, पिछले साल प्रेशराइजिंग फ्लशिंग सिस्टम में अचानक खामी आने लगी। इसके चलते बायोटॉयलेट से बदबू और गंदगी की शिकायतें आने लगीं। पता चला कि सिस्टम में सिलेंडर खराब हो रहे हैं।

कंपनी से संपर्क किया गया तो वह भी उपकरण उपलब्ध नहीं करा पाई। समय से मरम्मत नहीं करने के आरोप में कंपनी पर पेनाल्टी लगाई गई। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

अंतत: कारखाने में मुख्य कारखाना प्रबंधक सुनील कुमार शर्मा और उप मुख्य कारखाना प्रबंधक (कार्य) अनुज मिश्रा के सहयोग से पिस्टन बनाया। परीक्षण सफल हुआ तो दूसरी कंपनी में इसे भेजकर ऐसे ही पिस्टन बनाने का ऑर्डर देकर बनवाया गया।

प्रेशराइजिंग फ्लशिंग सिस्टम के सिलेंडर में इसे लगाते ही बायोटॉयलेट बेहतर ढंग से कार्य करने लगे। बकौल दिलीप, यात्रियों की शिकायत दूर हुई तो सुखद अनुभूति हुई। सीनियर सेक्शन इंजीनियर दिलीप के असाधारण योगदान को सम्मान मिला।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नौ जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (यशोभूमि), द्वारका में उन्हें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया।

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