गोरखपुर, जेएनएन। कोरोना संक्रमण तेजी से कम हो रहा है। संक्रमितों के मुकाबले शुक्रवार को चार गुना अधिक लोग स्वस्थ हुए। 19 की रिपोर्ट पाजिटिव आई तो 77 ने इस महामारी को मात दे दी है। 24 घंटे में कोई मौत नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग ने पूर्व में हुई तीन मौतों की सूचना जारी की है जो शुक्रवार को पोर्टल पर अपडेट की गई हैं।

सीएमओ डा. सुधाकर पांडेय ने बताया कि जिले में संक्रमितों की संख्या 59141 हो गई है। इसमें से 57870 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। 807 लोगों की मौत हो चुकी है। 464 सक्रिय मरीज हैं।

शासन का निर्देश बेअसर, घटने लगी कोरोना जांच की संख्या

एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार जांच बढ़ाने का निर्देश दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जिले में जांच की संख्या लगातार घटती जा रही है। अप्रैल-मई में जब संक्रमण अपने चरम पर था तो जांच का दायरा कई गुना बढ़ गया था। लेकिन जैसे-जैसे संक्रमण कम हो रहा है, स्वास्थ्य विभाग ने यह दायरा भी घटा दिया है। पिछले महीने में प्रतिदिन पांच से सात हजार नमूनों की जांच होती थी, जो घटकर अब 2500 से 3000 तक सिमट गई है। पिछले सप्ताह में केवल एक दिन 3228 की जांच हुई है।

15 मार्च के बाद संक्रमितों की संख्या धीरे-धीरे बढऩे लगी। अप्रैल आते-आते बड़ी संख्या में रोज संक्रमित मिलने लगे। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया। मई में प्रतिदिन पांच से सात हजार नमूनों की जांच होने लगी। जून में जैसे-जैसे संक्रमण का दायरा सिमट रहा है, वैसे-वैसे जांच का दायरा भी घटता जा रहा है। जबकि मुख्यमंत्री लगातार जांच बढ़ाने का निर्देश दे रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों की जांच कर संक्रमण की सही स्थिति का पता लगाया जा सके और उसके अनुरूप रोकथाम की कार्यवाही की जा सके। स्वास्थ्य विभाग पर इस निर्देश का कोई असर नहीं है। गांवों में चल रहा अभियान भी लगभग बंद है। आशा-आंगनबाड़ी कार्यकताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि घर-घर जाकर लोगों को जांच कराने के लिए प्रेरित करें। बावजूद इसके जांच की संख्या निरंतर घटती जा रही है। जांच के प्रति उदासीनता यह है कि सात जून को सिर्फ 1199 नमूनों की ही जांच हो पाई। सीएमओ डा. सुधाकर पांडेय के अनुसाार जांच की संख्या बढ़ाई जा रही है। प्रतिदिन चार हजार से अधिक जांच हो रही है। पहले लोग स्वे'छा से जांच कराने आते थे। अब प्रेरित करने के बाद भी नहीं आ रहे हैं। इससे थोड़ी दिक्कत हुई है, लेकिन जांच की संख्या लगातार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

Edited By: Satish Chand Shukla