काशिफ अली, गोरखपुर। कोरोना का असर ऊलेन कपड़ों के कारोबार पर भी दिखेगा। गोरखपुर समेत देशभर में 80 फीसद ऊलेन कपड़ों की आपूर्ति लुधियाना से होती है, लेकिन कोरोना की वजह से लुधियान में गारमेंट्स फैक्ट्री कई महीनों तक बंद रही। जब फैक्ट्री खुली तो मजदूर और कच्चा माल नहीं मिल पाया। अधिकांश बड़े कारोबारियों का आर्डर फैक्ट्री मालिकों ने लिया ही नहीं। जो लोग आर्डर देने लुधियाना पहुंचे उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

गोरखपुर में ऊलेन कपड़ों का करीब आठ सौ करोड़ रुपये का कारोबार है। आसपास के जिलों के अलावा बिहार और नेपाल के कुछ हिस्सों में यहीं से माल भेजा जाता है। थोक कारोबारी जून में कपड़ों का आर्डर देते हैं और 20 अगस्त से 20 सितंबर के बीच माल की आपूर्ति होती है, लेकिन इस बार आपूर्ति तो दूर फैक्ट्री मालिकों ने आर्डर तक नहीं लिया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि न सिर्फ गर्म कपड़ों की किल्लत होगी, बल्कि कीमतें भी 20 से 30 फीसद तक बढ़ सकती है। लुधियाना में मैनुफैक्चरिंग का काम करने वाले दिव्यांशु सचदेवा के मुताबिक फुल और ऊलेन माल में तेजी अभी से दिख रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह समय से प्रोडक्शन न होना है। 

पचास फीसद माल भी तैयार नहीं हो पाएगा इस वर्ष

धागे की कीमतों में तेजी और मजदूरों की कमी के चलते पिछले वर्ष के मुकाबले पचास फीसद माल भी तैयार नहीं हो पाएगा। इसलिए बाजार में गर्म कपड़ों का शार्टेज रहेगा। पांडेयहाता के थोक व्यापारी मो. आदिल ने बताया कि सितंबर के पहले सप्ताह तक माल की आपूर्ति हो जाती थी, लेकिन अब तक एक नग माल भी नहीं पहुंचा है। पिछले साल काफी ठंड पड़ी थी इसलिए दुकानदारों के पास पुराना स्टॉक भी नहीं है। थोक कारोबारी रामनाराण प्रजापति के अनुसार अक्टूबर से गर्म कपड़ों की बिक्री शुरू हाे जाती थी। बहुत से दुकानदारों ने आर्डर नाेट कराया है, लेकिन लुधियाना के हालात को देखकर लगता नहीं है कि हमलोग आर्डर को पूरा कर पाएंगे। दुकानदारों से इंतजार करने को कहा जा रहा है।

 

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