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गोरखपुर : देवरिया जिले में सरयू का उफान जानलेवा हो गया है। पानी से घिरे विशुनपुर देवार के ग्रामीणों पर घाघरा का कहर टूट रहा है। यहा के निवासी विकास यादव सात वर्ष की पानी में डूबने से मौत हो गई। करीब पांच सौ एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। प्रशासन ग्रामीणों को नाव नहीं उपलब्ध करा पाया है। राप्ती व गोर्रा नदी भी लाल निशान की ओर बढ़ रही है। पानी का सैलाब देखकर कछारवासियों के चेहरे पर तबाही का खौफ चस्पा हो गया है। जिलाधिकारी अमित किशोर ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और मातहतों को बाढ़ बचाव में लापरवाही न बरतने की हिदायत दी।

क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। विशुनपुर देवार, भदिला प्रथम, धनया उर्फ कुंद महाल के बाद कोलखास नदी बस्ती भी पानी से घर गया है। थाना घाट स्थित मापक पर घाघरा का जलस्तर 67.20 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 66.50 मीटर से 70 सेमी अधिक है। राप्ती भेड़ी के निकट खतरे के निशान से डेढ़ मीटर नीचे 69 मीटर व गोर्रा 69.50 मीटर पर प्रवाहित हो रही है। बाढ़ के पानी से दिया क्षेत्र के ग्राम विशनपुर देवार के अधिकांश टोले सरयू के पानी से घिर गए हैं। करीब तीन 350 एकड़ फसल भी जलमग्न हो गई है। स्थानीय निवासी रमेश यादव, मिश्रीलाल, सीताराम, रामऔतार, महेंद्र, शिवशंकर आदि ग्रामीण ने बताया कि हम लोगों के घरों के चारों तरफ पानी भर गया है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अशोक यादव ने बताया कि गांव से बाहर निकलने का कोई इंतजाम नहीं है। प्रशासन नाव नहीं उपलब्ध करा रहा है। बार-बार कहने के बावजूद तहसील प्रशासन हमारी बात नहीं सुन रहा है। ग्राम कटइलवा पर भी नदी लगातार दबाव बनाए हुए है। बाढ़ खंड द्वारा बंबोक्रेट के सुरक्षा के लिए बोल्डर लगाए गए हैं। गोरखपुर जनपद का समीपवर्ती गांव कोलखास की नई बस्ती भी पानी से घिर गई है। लोगों के घरों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। जबकि राप्ती के पानी से घिरे भदिला प्रथम, धनया उर्फ कुंदमहाल पर नदी ने दबाव बढ़ा दिया है। भदिला, धनया, भदिला द्वितीय, महेन, समोगर, कपरवार आदि गांवों की लगभग डेढ़ सौ एकड़ क्षेत्रफल में लगी धन, तिल, बाजरा, मक्का की फसल जलमग्न हो गई है। नदी में पानी बढ़ने से ग्रामीण भयभीत

भागलपुर में सरयू खतरे के निशान से 37 सेमी ऊपर बह रही है। केंद्रीय जल आयोग तुर्तीपार उभाव बलिया से मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार के सायं 4 बजे नदी का जलस्तर 64.370 सेमी दर्ज किया गया। जो खतरे के निशान से 37 सेमी ऊपर है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देख कर तटवर्ती गांव नर¨सहडाढ़, मईल, नरियांव, देवसिया, भागलपुर, बलिया उत्तर,बलिया दक्षिण, सहियागढ़, तकिया, धराहरा के ग्रामीण बढ़ते भयभीत है।

Posted By: Jagran

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