गोरखपुर, गजाधर द्विवेदी गीताप्रेस धार्मिक पुस्तकों को न सिर्फ सस्ते दर पर लोगों को उपलब्ध कराता है, बल्कि अति प्राचीन दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण भी कर रहा है। गीताप्रेस में श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस, उपनिषद, पुराण, वेदांत, साहित्य व कर्मकांड आदि की लगभग 2600 पांडुलिपियां संरक्षित हैं। इनमें ताड़ के पत्ते पर महाभारत की पांडुलिपि और स्वर्णाक्षरों, फूल-पत्तियों के रस से लिखी गई गीता की पांडुलिपि लगभग चार सौ साल पुरानी है। ज्यादातर पांडुलिपियां डेढ़-दो सौ साल पुरानी हैं। ताड़पत्र की पांडुलिपि अति दुर्लभ है। लगभग चार अंगुल चौड़े और दो मीटर लंबे ताड़पत्र पर हाथ से लिखी गई बंगला भाषा में महाभारत की यह प्रति है। इसे साखू के प्लेट के बीच सुरक्षित रखा गया है और उसे काठ के बाक्स में रखा जाता है। हर तीन माह पर ब्रश से सफाई की जाती है।

ऐसे की जाती संरक्षण की व्यवस्था

गीताप्रेस ने दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण की उत्तम व्यवस्था की है। एसिड फ्री बोर्ड व हैंडमेड पेपर के बीच में पांडुलिपियों को सुरक्षित रखा गया है। पांडुलिपियों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर उनका रासायनिक उपचार भी किया जाता है। एक अलग बड़े कक्ष में 95 आलमारियों में ये पांडुलिपियां रखी गई हैं।

कैसे प्राप्त हुई पांडुलिपियां

अप्रैल 1950 में प्रकाशित कल्याण के ’हिंदू संस्कृति अंक’ में तत्कालीन संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने पाठकों से अपील की थी कि यदि उनके पास कोई पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि हो तो उसे गीताप्रेस संरक्षित करना चाहता है।

बनाए रखेंगे लोगों का विश्‍वास

गीताप्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने कहा कि गीताप्रेस पांडुलिपियों के संरक्षण की पूरी व्यवस्था करता है। जिस विश्वास के साथ पाठकों ने हमें पांडुलिपियां सौंपी है, उस विश्वास को बनाए रखने के लिए हम हर जतन करेंगे। पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने की कोशिश करते रहेंगे।

महत्वपूर्ण पांडुलिपियां

- स्वर्णाक्षरों में गीता की पांडुलिपि

- गीता की पांडुलिपि जिसमें चित्र फूल-पत्ती के रस से बनाए गए हैं

- महाभारत की नीलकंठी टीका, हैंडमेड पेपर पर

- बंगला भाषा में महाभारत, ताड़पत्र पर

- बृहदारण्यक उपनिषद

- एतरेय उपनिषद

- कठोपनिषद

- श्रीरामचरितमानस

- श्रीमद्भागवत की श्रीधरी टीका

- श्रीमद्भागवत महापुराण

- शिव पुराण

- देवी पुराण।

Posted By: Pradeep Srivastava

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