गोरखपुर, जेएनएन। ताल सुमेर सागर में अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने स्वीकृत मानचित्रों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि महायोजना 2021 में ताल की इस जमीन को नगरीय नियमित क्षेत्र के रूप में अंकित किया गया है, जबकि ताल, पोखरे की जमीन की स्थिति किसी भी सूरत में बदली नहीं जा सकती।

अपूर्ण दस्तावेज के आधार पर स्वीकृत किए गए थे मानचित्र

अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह बात सामने आई थी कि जीडीए ने दो मकानों के मानचित्र पास किया है। इसमें से आशीष सक्सेना के मकान का मानचित्र 2001 में जबकि यशवंत सिंह का मानचित्र 2010 में स्वीकृत किया गया। दोनों की गाटा संख्या 1002 है। मानचित्र अपूर्ण दस्तावेज के आधार पर पास किए गए थे। प्राधिकरण में आंतरिक रूप से कराई गई जांच में यह बात सामने आई है कि महायोजना में ताल की इस जमीन को नगरीय नियमित क्षेत्र अंकित किया गया है।

जीडीए ने शुरू की ताल की जमीन पर स्वीकृत किए गए मानचित्रों को निरस्त करने की प्रक्रिया

सूत्रों की मानें तो मानचित्र विभाग इस बात का तर्क रख रहा है कि महायोजना के विवरण के आधार पर यह चूक हो गई। जीडीए के सचिव ने इस तर्क को सही नहीं माना है। दोनों मानचित्रों की स्थिति की रिपोर्ट जीडीए उपाध्यक्ष अनुज सिंह को भेज दी गई है। सम्बंधित पक्ष को सुनवाई का मौका मिलेगा या नहीं इस बात का निर्णय उपाध्यक्ष को करना है। एक कर्मचारी के कोरोना संक्रमित हो जाने के कारण प्राधिकरण कार्यालय को दो दिन बन्द करना पड़ा। जिससे कार्रवाई नहीं हो पाई है। मानचित्र निरस्त होने की कार्रवाई कार्यालय खुलने पर होगी। संबधित कर्मचारियों पर भी कार्रवाई का फैसला हो सकता है।

छह और मानचित्रों की हो रही जांच

ताल सुमेर सागर क्षेत्र में दो नहीं बल्कि आठ मानचित्र पास हुए हैं। अन्य आवेदन निरस्त हो गए थे। तहसील से रिपोर्ट आने के बाद दो मानचित्रों को फर्जी मान लिया गया है। शेष छह की भी जांच चल रही है। इसकी रिपोर्ट भी तहसील से मांगी गई है लेकिन अभी तक प्राधिकरण को विवरण नहीं प्राप्त हुआ है।

मानचित्रों को गलत तरीके से पास करने की रिपोर्ट उपाध्यक्ष को भेज दी गई है। अपूर्ण दस्तावेज  होने पर भी इसे पास किया गया है। महायोजना में ताल की इस जमीन को नगरीय नियमित क्षेत्र के रूप में अंकित किया गया है जबकि ताल की जमीन को परिवर्तित नहीं किया जा सकता। - राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए।

Posted By: Pradeep Srivastava

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