गोरखपुर, जेएनएन। हाईकोर्ट प्रयागराज ने सोमवार को गोरखपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में 26 अप्रैल तक लाकडाउन लगाने का निर्देश दिया। यह बात सार्वजनिक होते ही घर में बैठे लोग बाजार की ओर दौड़ पड़े और उनमें जरूरत के सामान खरीदने की होड़ मच गई। यह स्थिति तब थी जब सभी इस बात को जानते हैं कि लाकडाउन में भी जरूरत के सभी सामान मिलते हैं। आवश्यक सेवाओं को इससे छूट दी जाती है। 35 घंटे के कोरोना कर्फ्यू के बाद सोमवार को भी जिस तरह से लोगों में कोरोना से बचाव को लेकर जागरूकता नजर आयी थी, शाम को उसके ठीक विपरीत स्थिति नजर आयी। फिलहाल सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी ओर से सख्ती जरूर बरती जाएगी लेकिन लाकडाउन नहीं लगाया जाएगा।

दिन भर सड़कों पर रहा सन्‍नाटा

इस सप्ताह का सोमवार पिछले कई बार से अलग नजर आया। सड़क का प्रमुख बाजार गोलघर हो या मोहद्दीपुर, असुरन हो या राप्तीनगर, कहीं भी भीड़ नहीं दिखी। सड़कें शांत नजर आयीं। दुकानों पर भी इक्का-दुक्का लोग पहुंचे। रेती, घंटाघर में सकरी सड़कों पर हल्की भीड़ जैसा दिखा लेकिन लोगों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में यहां भी कम दिखी। जो दिखे, उनमें 90 फीसद से अधिक ने मास्क भी लगाया था। लोगों की यह सतर्कता सराही भी गई। पर, शाम को अचानक लाकडाउन की खबर मिलते ही दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगी। कोई कई दिनों के लिए किराना को सामान खरीदने में जुटा था तो कुछ लोग सब्जी के ठेले पर भीड़ लगाए थे। यह स्थिति शहर के लगभग हर प्रमुख चौराहों पर नजर आयी। लोगों के बीच केवल लाकडाउन की ही चर्चा रही।

शहर से बाहर जा चुके लोगों की बढ़ी चिंता

लाकडाउन का समाचार जैसे ही वायरल हुआ लोग एक-दूसरे को फोन कर इसकी पुष्टि भी करने लगे। कई लोग निजी कार्य से शहर के बाहर गए थे। उन्होंने अपने जानने वालों को फोन कर पूछा कि लाकडाउन लग गया है, रात को शहर से बाहर रुकें या घर लौट आएं। कोई अपने स्वजन को लेने के लिए दूसरे शहर में पहुंच चुका था, इस बात का समाचार मिलते ही वह भी सशंकित हो गया कि कहीं गोरखपुर जिले की सीमा में प्रवेश ही प्रतिबंधित न हो जाए।

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