गोरखपुर, जेएनएन। बस्ती जिले की बहुचर्चित संत कुटीर आश्रम डमरुआ बस्ती में एक युवक और उसकी दो बहनों को ले जाने और बाद में उनका पता न चलने पर लालगंज थाने में नौ मार्च को हत्या, साक्ष्य मिटाने और साजिश की धारा में महंत सच्चिदानंद और उनके सहयोगियों पर मुकदमा पंजीकृत किया था। मामले में चार साध्वियों को जेल जाना पड़ा था। अचानक युवक के बिहार के शेखपुरा में कुछ साध्वियों के साथ साधुवेश में तपस्यानंद के रूप में जिंदा मिलने पर मामले में नया मोड़ आ गया। हालांकि मामले में अभी युवक के गांव छानबीन के लिए पुलिस नहीं पहुंची है।

काफी खोजबीन के बाद भी नही चला था पता

लालगंज थाना के सेल्हरा गांव की कमलावती देवी ने नौ मार्च 2018 को पुलिस को तहरीर देकर कहा था कि 30 नवंबर 2017 की शाम को सच्चिदानंद उर्फ दयानंद, उनके सहयोगी दीपानंद, अभेदानंद, कमलाबाई, शीतला बाई, मांडवी, रश्मिबाई, मालती सत्यलोक आश्रम स्थित सेल्हरा आए। उनके बेटे श्यामचंद, बेटी सरोज व बिलायती को यह कह कर अपने साथ ले गए कि बस्ती स्थित आश्रम में इनके साथ ट्रस्ट संबंधी मामलों में कुछ विचार करना है। बेटियां तो बाद में वापस आ गईं, मगर बेटा लौटकर नहीं आया। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला।

मां को विश्‍वास नहीं हुआ कि जिंदा है बेटा

उन्हें लगा कि पुत्र की हत्या कर शव गायब कर दिया गया हैं, क्योंकि संत कुटीर आश्रम में हो रहे आपराधिक कृत्य के बारे में वह जानता था और वह पुलिस को जानकारी देने वाला था। लालगंज पुलिस ने पहले पहले हत्या, साक्ष्य मिटाने और साजिश की धारा में आरोपितों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया, बाद में कोर्ट ने इसे जान से मारने की नीयत से अपहरण और साजिश के धारा में बदल दिया। श्यामचंद की मां को जब यह जानकारी मिली कि बेटा जिंदा है तो वह फफक पड़ी, पर उन्हे विश्वास नहीं हो रहा था। कहा कि जब तक उनकी आंखों के सामने बेटा आ नहीं जाता तब तक उन्हे संतोष नहीं होगा।

गांव मान चुका था मृत

बिहार प्रांत के शेखपुरवा में लालगंज थाने के ग्राम सेल्हरा निवासी युवक श्यामचंद के दो वर्ष पूर्व हत्या किए जाने के दर्ज केस के बाद जिंदा होने की खबर मिलने पर गांव में चर्चाएं गरम हैं। हालाकि थानाध्यक्ष लालगंज अनिल कुमार सिंह ने बिहार पुलिस द्वारा अब तक ऐसी कोई सूचना देने से इन्कार किया है। मां भी बेटे के जिंदा होने की बात पर विश्वास नहीं कर पा रहीं, लेकिन चर्चाओं के बीच भावनाओं को रोक भी नहीं पा रहीं।

दैनिक जागरण ने बिहार के नवादा जिले के एक आश्रम की साध्वियों द्वारा साधु वेश युवक को श्यामचंद के रूप में पहचान करने पर पुलिसिया कार्रवाई के बाद जिंदा होने की खबर प्रकाशित की। इसके बाद गांव में लोग अनके तरह की चर्चाओं में मशगूल दिखे, लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं दिखा। मां कमलावती देवी ने नौ मार्च 2018 को तहरीर देकर कहा था कि 30 नवंबर 2017 की शाम को सच्चिदानंद उर्फ दयानंद, उनके सहयोगी दीपानंद, अभेदानंद, कमलाबाई, शीतला बाई, मांडवी, रश्मिबाई, मालती सत्यलोक आश्रम स्थित सेल्हरा आए। बेटे के साथ बेटी सरोज व बिलायती को आश्रम ले गए। बेटियां वापस आ गईं, बेटा लौटकर नहीं आया। इस मामले में जान से मारने की नीयत से अपहरण और साजिश का केस दर्ज है। चार साध्वियों को जेल भी भेजा गया। 

Posted By: Pradeep Srivastava

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