यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 16, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पूर्व सांसद रामनगीना मिश्र का निधन, शोक की लहर
कुशीनगर की पडरौना लोक सभा सीट से चार बार और सलेमपुर लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे रामनगीना मिल ...और पढ़ें

कुशीनगर : छह बार सांसद व एक बार विधायक रहे पडरौना तहसील क्षेत्र के सिकटा गांव निवासी 93 वर्षीय पं. रामनगीना मिश्र का गुरुवार को सुबह सात बजे लखनऊ स्थित उनके पुत्र डा. पीआर मिश्र के आवास पर निधन हो गया। निधन की खबर सुनते ही राजनीतिज्ञों, शुभचितकों में शोक की लहर दौड़ गई।
1972 में सेवरही विधानसभा क्षेत्र से सोशलिस्ट पार्टी से एक बार विधायक, दो बार कांग्रेस से सलेमपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे स्व. मिश्र ने कांग्रेस सांसद रहते हुए 1988 में संसद में राम मंदिर का मुद्दा उठाया। इसी मुद्दे पर कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए। 1991 से 2004 तक चार बार लगातार भाजपा से पडरौना संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे।
राम मंदिर के मुद्दे पर रामनगीना ने छोड़ी थी कांग्रेस
पूर्व सांसद रामनगीना मिश्र का नाम राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष करने वालों की सूची में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने 1988 में कांग्रेस सांसद रहते हुए संसद में यह मुद्दा उठाया था। तमाम लोगों ने उनका भारी विरोध किया तो उन्होंने पलटकर पूछा था कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो क्या काबा में बनेगा। इस पर शहाबुद्दीन व अन्य ने भारी विरोध किया और उनके ऊपर असत्य के भाषण के लिए प्रिविलेज मोशन का प्रस्ताव रखा गया। दंडित करने की बात भी की गई। उन्होंने स्वयं अयोध्या जाकर पूरी सत्यता के प्रमाण जुटाकर गर्भगृह में निर्मित चबूतरा एवं देवी देवताओं की मूर्ति का साक्ष्य प्रस्तुत किया।
प्रमाणित किया कि वहां राम मंदिर को तोड़कर बाद में मस्जिद बनायी गई थी। इसके बाद प्रिविलेज मोशन खारिज हुआ था। बाद में कांग्रेस के घोषणा पत्र के लिए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण मुद्दा शामिल करने का प्रस्ताव किया। पार्टी द्वारा अस्वीकार करने पर यह कहते हुए कि पार्टी छोड़ दी कि जिसको राम प्रिय नहीं, उसे त्याग दीजिए।
पडरौना तहसील के सिकटा गांव निवासी किसान यमुना मिश्र के पुत्र राम नगीना का राजनैतिक सफर तत्कालीन सेवरही विधानसभा क्षेत्र से बाबू गेंदा सिंह के सीट रिक्त करने से 1972 के उपचुनाव में सोशलिस्ट पार्टी से विधायक चुने जाने से शुरू हुआ। कांग्रेस से 1980 में सलेमपुर से सांसद चुने गए, 1985 में भी जीत दर्ज की। राम मंदिर के नाम पर कांग्रेस छोड़ी। 1991 से 2004 तक लगातार पडरौना से चार बार सांसद रहे। 1996 के चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी उनके प्रचार में आए थे। 2004 के बाद सक्रिय राजनीति से दूर होते चले गए। राममंदिर निर्माण के लिए उन्होंने वर्ष 2020 में एक लाख रुपया मंदिर न्यास को दान भी किया।
पूर्व सांसद के निधन पर भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रेमचंद मिश्र, भाजपा नेता अजय तिवारी, पूर्व विधायक पं. नंदकिशोर मिश्र, पूर्व विधायक डा. पीके राय, पूर्व विधायक पं. आनंद शर्मा, चेयरमैन श्यामसुंदर विश्वकर्मा आदि ने शोक व्यक्त किया है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
राम नगीना मिश्र की पत्नी सीता देवी का 2004 में निधन हो गया था। इनके सबसे बड़े पुत्र वशिष्ठ मिश्र चीनी मिल के जीएम रह चुके हैं, दूसरे नंबर के पुत्र डा. पीआर मिश्र, तीसरे नंबर के पुत्र राम बेलास मिश्र व्यवसायी हैं, चौथे नंबर के पुत्र कैप्टन राजेश मिश्र हैं। पुत्रियां सुभद्रा देवी व दुर्गावती देवी हैं।
