गोरखपुर/संतकबीर नगर, (हरिशंकर साहनी)। संतकबीर नगर जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर खलीलाबाद-मेहदावल मार्ग पर बखिरा की मोती झील में नवंबर से प्रवासी पक्षियों के कलरव से झील गुलजार हो उठी है। यह लोगों को काफी आकर्षित करता है। वहीं इन पक्षियों के आते ही शिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। विभाग की लाख कोशिशों के बावजूद विदेशी मेहमानों के शिकार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। विभाग की निष्क्रियता एवं देखरेख की लचर व्यवस्था के कारण शिकारी बेखौफ शिकार कर शौकीनों के हाथ मुंहमांगी रकम लेकर बेच रहे हैं।

प्रवासी पक्षियों की जलक्रीड़ा से लोग होते हैं मोहित

सर्दियों मे झील में हजारों किमी की उड़ान भर कर आए प्रवासी पक्षियों की सुबह-शाम जलक्रीड़ा यहां आने वाले लोगों को मोहित कर देती है। वर्ष 1990 में पक्षी विहार घोषित होने के बाद यहां पक्षियों के शिकार को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था। बखिरा की मोती झील विदेशी पक्षियों की मनपसंद बसेरा है। हजारों की संख्या में रंग-बिरंगी पक्षियों की चहचहाहट लोगों का आकर्षण का केंद्र बन जाता है। वन विभाग की इन मेहमानों की देखरेख की लचर व्यस्था के कारण झील से सटे शनिचरा, झुगि‍या, बडग़ों समेत कई गांवों के दर्जनों की संख्या में शिकारी झील में उतर जाते हैं। बेखौफ होकर रात्रि में बेजुबानों का शिकार करके चले जाते हैं। मेहमानों को डाले जाने वाला दाना ही इनके मौत का कारण बन जाता है। शिकारियों का झुंड रात्रि में दाने में बेहोशी की दवा मिलाकर इन पक्षियों को पकड़ लेते हैं।

एनजीटी के जस्टिस को सौंपी गई है इस पक्षी विहार की रिपोर्ट

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा गठित हाई पावर कमेटी के चेयरमैन जस्टिस डीपी सिंह की अध्‍यक्षता वाली कमेटी की मांग पर हाल ही में खलीलाबाद के एसडीएम एसपी सिंह ने बखिरा पक्षी विहार की रिपोर्ट सौंपी थी। इन्होंने कमेटी को बताया कि इसका क्षेत्रफल लगभग 2900 हेक्टेयर है। महराजगंज के सोहगीबरगा के वनाधिकारी के नियंत्रण में यह पक्षी विहार है। इस जिले के तत्कालीन डीएम मार्कण्डेय शाही ने शासन के पास पत्र भेजकर इसका नियंत्रण इस जिले के डीएफओ के अधीन करने का अनुरोध किया था।

चार से पांच हजार किमी दूर से आते हैं ये पक्षी

नवंबर माह से ही साइबेरिया, चीन व अन्य देशों से लालसर, डुबडूबी, जलकौआ, सिलेटी अंजन, लाल अंजन, गेाई लाल, गोई, रंगीन जांघिल, काला जांघिल, सफेद बाज, काला बाज, सवन, सुर्खाव, कपासी चील, बडा गरुण, नील सर, सारस, ताल मखानी, पीली टिटिहरी, हुदहुद जैसे अनेक तरह के पक्षियों से झील गुलजार हो जाती है। ये चार से पांच हजार किमी दूर से आते हैं।

स्थानीय पक्षी भी बढ़ाते हैं यहां की खूबसूरती

झील मे स्थानीय पक्षी दयाल, बबूना, अबलकी, मैना, हरा पतंग, सामान्य भुजंगा, नीलकंठ, बडा खोटरू, सिपाही बुलबुल, पवई, मैना, पीलक, चित्ति मुनिया, ठठेरा बसन्धा, कोयल, जंगली गौगाई चरखी, सिलेटी धनेश, घरेलू गौरैया, लाल तरुपिक, हुदहुद, पीला खंजन, सफेद खंजन, टिकिया, कैमा आदि झील की सुन्दरता को चार चांद लगा देते है।

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