गोरखपुर, जेएनएन। बरसात शुरू होते ही बाढ़ का कहर शुरू हो गया है। गोरखपुर के जंगल कौडि़या विकास खंड में आठ मकान राप्‍ती की धारा में विलीन हो गए। इसके साथ ही एक पुराना शिव मंदिर भी नदी में समा गया। आठ मकानों के नदी में डूबने की रिपोर्ट तहसीलदार सदर से अपर जिलाधिकारी को सौंपी है। बाढ़ का कहर शुरू होते ही अधिकारियों और राजनीतिक दलों के लोगों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है।

पहाड़ों पर बारिश से उफनाईं नदियां

पहाड़ों पर लगातार बारिश से सरयू, राप्ती, रोहिन व आमी नदी का जल स्तर बढऩे के साथ ही समीपवर्ती गांवों में पानी फैलने लगा है। जर्जर तटबंध व अधूरी तैयारियों के बीच बाढ़ की आशंका से ग्रामीण सहम गए हैं। ङ्क्षसचाई विभाग का दावा 15 जून से पहले बाढ़ बचाव से संबंधित कार्यों को पूरा कर लेने का था, लेकिन अधिकांश तटबंधों पर कार्य पूरा नहीं हो सका है। बारिश के कारण तटबंधों पर काम बेहद मुश्किल होता जा रहा है। रैटहोल, रेनकट व झाड़-झंखाड़ से युक्त तटबंधों के कारण जिले में मचने वाली तबाही रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। 

बोक्टा-बरवार बांध के शून्य से 1.5 किमी तक निचले हिस्से को काट रही राप्ती

सहजनवां तहसील क्षेत्र में राप्ती व आमी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। राप्ती नदी बोक्टा-बरवार बांध के शून्य से 1.5 किमी तक निचले हिस्से को काट रही है। सहजनवां-डुमरिया बाबू बांध के टिकरिया व सिसई में भी कटान हो रही है। तटबंधों के रैट होल तक नहीं भरे जा सके हैं। आमी नदी का पानी सुथनी, गहिरा, डोमरडार, चकचोहरा तक फैल गया है। बेलवाडाड़ी, कोल्हुई, कटका, गाडर आदि गांवों के करीब तक पानी पहुंचा है। गहिरा में प्रशासन ने एक नाव उपलब्ध कराई है। गोला तहसील क्षेत्र में भी ग्रामीण बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। बड़हलगंज में राप्ती नदी जगदीशपुर, पौहरिहा, खुटभार व सरयू नदी गोपलामार, बुढऩपुरा, मुक्तिपथ पर कटान कर रही है। कोठा-नवलपुर, बैरियाडीह-ददरी, टेढिय़ा बांध पर मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है। गजपुर में राप्ती के कटान स्थल पर अस्थाई बांस-बल्ली लगाकर काम शुरू हुआ है। कौड़ीराम-मलौली एवं मलौली-गजपुर तटबंध बेहद कमजोर हो गए हैं। भरवलिया गांव की सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे एप्रन पिचिंग का काम पानी बढऩे से ठप है।

जर्जर हो चुके हैं कई बांध

कैंपियरगंज क्षेत्र में करमैनी-पनघटिया बांध की स्थिति जर्जर हो चुकी है । ग्रामीणों के अनुसार वर्षों से बंधे की मरम्मत नहीं हुई है। गायघाट और कोनी के ग्रामीणों ने बंधे के किनारे अतिक्रमण भी कर लिया है।

चौरीचौरा तहसील क्षेत्र के दोआबा में राप्ती व गोर्रा का पानी बढऩे से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। तहसीलदार संजय ङ्क्षसह कहते हैं कि फिलहाल कोई खतरा नहीं है। बाढ़ से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी चल रही है। पीपीगंज में करीब 12 किमी लंबे मखनहा तटबंध (अकटहवा से रायपुर तक) पर रैट होल के कारण नदी कटान कर रही है। साकेत यादव, लौहर यादव, हरिश्चंद निषाद, रामरतन, दीनदयाल निषाद आदि का कहना है कि एक वर्ष से अधिक हो गए, विभाग द्वारा कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है।

बाढ़ खंड, बाढ़ खंड-दो व ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंताओं के साथ लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। तटबंधों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इस कार्य में कोई लापरवाही मिलती है तो संबंधित के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। - राजेश सिंह, एडीएम वित्त व प्रभारी आपदा

Posted By: Pradeep Srivastava

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