गोरखपुर, उमेश पाठक। एक बार फिर से देसी गायें किसानों को भाने लगी हैं। दरवाजे पर बंधी फीजियन गाय या भैंस की जगह लेने लगी हैं। वजह साफ है। ये दूध फीजियन के लगभग बराबर देतीं हैं, पर दूध की मांग अधिक होने के साथ ही कीमत भी ज्यादा मिल जाती है। साथ ही गोबर एवं गोमूत्र से अतिरिक्त लाभ हो रहा है। अभी तक जिले के पाली व सहजनवां ब्लाक में 35 से अधिक किसान देसी गाय ला चुके हैं।

कृषक उत्‍पादक संगठन किसानों काे कर रहे प्रेरित

जैविक खेती को प्रोत्साहित करने वाले कृषक उत्पाद संगठन की ओर से भी किसानों को घर पर इनको पालने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशंस) ब्रह्म कृषि बायो एनर्जी की ओर से किसानों से मिलकर देसी गाय के फायदे बताए जा रहे हैं। एफपीओ के संपर्क में आने के बाद भैंस की जगह घर पर देसी गाय लाने वाले किसान देवशरण यादव बताते हैं कि देसी गाय का दूध अ'छी कीमत में बिक जाता है। गो-मूत्र से खेतों में छिड़काव भी होता है। उन्होंने साहीवाल गाय खरीदी है। जगदीशपुर गाही के लवकुश के पास छह देसी गायें हैं।

60 रुपये प्रति लीटर बिकता है दूध

लवकुश बताते हैं कि साहीवाल गाय का दूध जहां 60 रुपये प्रति लीटर मिलता है वहीं गीर गाय का दूध 80 रुपये लीटर तक बिक जाता है। सहजनवां ब्लाक के केशोकुरहा गांव निवासी मूलचंद फीजियन गाय की जगह देसी गाय लेकर आए हैं। उनका कहना है कि देसी गाय के दूध की खूब मांग है और इसके गोबर एवं गोमूत्र का प्रयोग भी हो जाता है। पिछले छह वर्षों से देसी गाय पालने वाले पाली ब्लाक के रानूखोर निवासी विश्वनाथ बताते हैं कि देसी गाय का दूध काफी पौष्टिक होता है। इसके सेवन से बीमारियां कम होती हैं। इसी तरह कोल्हुई के रवींद्र तिवारी भी देसी गाय पालते हैं।

एफपीओ करता है गोमूत्र का उपयोग

एफपीओ के संचालक महेंद्र यादव बताते हैं कि फीजियन गाय के दूध में पोषक तत्वों की कमी होती है। देसी गाय में यह पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। हम किसानों से गोबर एवं गोमूत्र भी लेते हैं। कई किसान गोमूत्र का उपयोग स्वयं लेते हैं और जो बेचना चाहते हैं, उनसे एफपीओ खरीद लेता है। देसी गाय के गोबर से दीये भी बनाए जाते हैं। गोबर की भी कीमत मिल जाती है। एफपीओ के जरिए कई किसानों को वर्मी कंपोस्ट बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है, वहां भी गोबर का प्रयोग हो जाता है।

Edited By: Navneet Prakash Tripathi