गोरखपुर, उमेश पाठक। घर की विपरीत परिस्थितियों ने कुछ समय के लिए मीनाक्षी को परेशान जरूर किया था लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा था। घनघोर आर्थिक संकट से जूझते हुए मीनाक्षी ने स्वयं को संभाला और आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ चलीं। वर्तमान में वह स्वयं तो अपने पैरों पर खड़ी हैं ही, 300 से अधिक महिलाओं को भी राह दिखायी है।

मुश्किलों से नहीं डिगा मिनाक्षी का हौसला

मूल रूप से बिहार की रहने वाली मीनाक्षी की शादी के बाद कुछ दिनों तक सब ठीक रहा लेकिन अचानक परिवार में स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के कारण आर्थिक स्थिति चरमरा गई। स्थिति इतनी विपरीत थी कि खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा था। मीनाक्षी ने परिस्थितियों से घबराने की बजाय उसका डटकर मुकाबला करने की ठानी।

सिलाई-कढाई सीखकर बनीं स्‍वावलंबी

सिलाई-कढ़ाई सीखकर धीरे-धीरे स्वावलंबी बनने की ओर अग्रसर हुईं। गोरखपुर में आने के बाद जिला उद्योग केंद्र से जुड़कर सिलाई का काम शुरू किया। मास्क, बैग आदि बनाने लगीं। उनसे प्रभावित होकर और भी महिलाएं उनसे जुडऩे लगीं। कई ऐसी महिलाएं भी थीं जिन्होंने मीनाक्षी के साथ जुड़कर अपने स्वावलंबी बनीं और कोरोना काल में अपने परिवार का भरण पोषण किया। करीब 40 महिलाएं उस दौरान हर महीने आठ से

बना चुकी हैं 40 से अधिक स्वयं सहायता समूह

वर्तमान में मीनाक्षी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में जुटी हैं। 40 से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें आय अर्जित करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इस समय करीब 300 महिलाएं उनसे जुड़ी हैं और स्वरोजगार के लिए उन्हें प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। समूहों को उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देने से लेकर बाजार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी उठाती हैं। मीनाक्षी समूह के उत्पादों की बिक्री के लिए जगह -जगह दुकानों से संपर्क भी कर रही हैं।

परिवार ने भी किया समर्थन

मीनाक्षी राय बताती हैं कि शुरू में मुझे काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। आय अर्जित करने के लिए सिलाई-कढ़ाई सीखी। परिवार का भरपूर समर्थन मिला और धीरे-धीरे स्थितियां सुधरने लगीं। कुछ परेशान महिलाएं मुझसे मिलीं तो उन्हें भी अपने साथ जोड़ा है। अधिक से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है।

Edited By: Navneet Prakash Tripathi