गोरखपुर, जेएनएन। इंजीनियरिंग फैकल्टी की शुरुआत के लिए प्रयासरत गोरखपुर विश्वविद्यालय की कोशिशें रंग लाने लगी हैं। विश्वविद्यालय के प्रस्ताव पर शासन ने पत्र भेजकर छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। माना जा रहा है कि जल्द ही शासन स्तर से इंजीनिय¨रग फैकल्टी की स्थापना को मंजूरी मिल जाएगी। विश्वविद्यालय कार्यपरिषद ने बीते वर्ष दिसंबर में ही इंजीनियरिंग संकाय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नए संकाय की शुरुआत बीटेक कोर्स से होनी है।
शुरुआत में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग और इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की पढ़ाई होनी प्रस्तावित है। कार्यपरिषद की मंजूरी के बाद इसे कुलाधिपति की स्वीकृति के लिए भेजा गया था। साइंस म्यूजियम होगी इंजीनिय¨रग फैकल्टी फौरी तौर पर साइंस म्यूजियम को ही इंजीनिय¨रग फैकल्टी का रूप दिया जाना प्रस्तावित है। बीटेक की हर शाखा में 60 सीटों पर दाखिला लिया जाएगा। सेमेस्टर प्रणाली आधारित यह कोर्स पूरी तरह स्ववित्तपोषित श्रेणी का होगा और दाखिले के लिए एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा की रैंकिंग आधार होगी।
इस नए कोर्स में भी मूल्यांकन के लिए ग्रेडिंग प्रणाली पर अमल करने का प्रस्ताव है। चार साल में पास होने के लिए छात्र को न्यूनतम 192 क्रेडिट जुटाने होंगे। नगर विधायक ने जताई थी आपत्ति नए संकाय स्थापना की तैयारियों के बीच नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए पिछले दिनों कुलाधिपति राम नाईक से मुलाकात की थी। विधायक का कहना था कि शहर में एमएमएमयूटी पहले से ही गुणवत्तापरक तकनीकी शिक्षा दे रहा है, वहीं गोरखपुर विश्वविद्यालय में कृषि संकाय की स्थापना की वर्षो पुरानी मांग अब तक पूरी न हो सकी है। बेहतर हो कि यहां कृषि संकाय की स्थापना के लिए प्रयास हो।
विश्वविद्यालय को देनी है यह जानकारी
- प्रति वर्ष कोर्स में कितने सीटों पर दाखिला होगा ?
- कक्षाओं, प्रयोगशालाओं की क्या व्यवस्था है ?
- अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की स्वीकृति है या नहीं ?
- शिक्षक और कर्मचारियों के क्या इंतजाम हैं ?
- कोर्स संचालन में होने वाला खर्च का प्रबंधन कैसे होगा ?
- वर्तमान में संचालित पाठ्यक्रमों में वेतन और गैर वेतन मदों में कितना खर्च होता है ?

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