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चाय मांगने पर बुजुर्ग होम्योपैथी डॉक्टर को पत्नी-बेटी ने घर से निकाला, गोरखपुर में मिला सहारा

Published: Wed, 26 Aug 2026 09:31 AM (IST)

कुशीनगर के 65 वर्षीय होम्योपैथी चिकित्सक को बेटी से चाय मांगने पर पत्नी-बेटी ने घर से निकाल दिया और धोखे ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. बेटी से चाय मांगी, पत्नी-बेटी ने बुजुर्ग डॉक्टर को घर से निकाला।

  2. उपचार के बहाने धोखे से गोरखपुर बस में बैठाकर भेजा गया।

  3. गोरखपुर बस स्टैंड पर असहाय मिले, रैन बसेरा में मिला सहारा।

संवाद सूत्र, चरगांवा, गोरखपुर। जीवन को खुशियों से महकाने की चाह लिए बागबां ने जवानी भर पसीना बहाकर जिस बगिया को सींचा, बुढ़ापे में उसी के कांटों ने उनका कलेजा छलनी कर दिया। बिटिया से एक कप चाय मांगने के कसूर में बुजुर्ग होम्योपैथी चिकित्सक को सजा के तौर पर घर निकाला मिला। धोखे से बस में बैठाकर कुशीनगर से गोरखपुर भेज दिए गए बुजुर्ग बस स्टैंड पहुंचे, तो माजरा समझ स्वयं की हालत पर फफक पड़े।

अपनों के सताए इस लाचार पिता के आंसुओं ने भीड़ को द्रवित किया, तो किसी ने नगर निगम के प्रवर्तन दल को सूचना दी। टीम उन्हें पहले सिटीजन डे केयर सेंटर ले गई और फिर वहां से फातिमा बाईपास के निकट स्थित रैन बसेरा में संचालित इस्माइल रोटी संस्था भेज दिया गया।

जौनपुर से बीएचएमएस डिग्रीधारी कुशीनगर जनपद के हाटा थाना के ग्राम कंचनपुर निवासी डा. अजय पांडेय (65) अपने साथ हुए धोखे को समझ चुके हैं, लेकिन मन अपनों द्वारा बरते बेगानेपन को स्वीकार नहीं कर पा रहा। रैन बसेरा में रोते हुए वह अपनी पूरी कहानी सुनाते हैं। घर से करीब 10 किलोमीटर दूर बैसही बाजार में लंबे समय तक होम्योपैथी की क्लीनिक चलाई। बीते 10 साल से बीमार होने के कारण प्रैक्टिस छोड़कर घर पर रहने लगे। उनका एक बेटा और दो बेटियां हैं।

बेटा गुजरात में नौकरी करता है और एक बेटी की शादी हो चुकी है। छोटी बेटी पत्नी के साथ घर पर रहती है। चलने-फिरने में दिक्कत के साथ शुगर-बीपी से पीड़ित इस चिकित्सक की त्रासदी यह है कि जिसने पूरा जीवन दूसरों को सेहत के लिए समर्पित किया, आज वही दवाओं के लिए तरस रहा है।

पत्नी-बेटी असहाय हालत पर सेवा की जगह मारपीट करती हैं। डा. अजय पांडेय रुंधे गले को साफ कर बताते हैं कि सोमवार को बेटी से सिर्फ एक कप चाय बनाने के लिए कहा था, जिस पर बेटी बोली- हम आपके नौकर नहीं हैं। इसके बाद उन्हें मंगलवार सुबह राजेश नाम के एक व्यक्ति के साथ उपचार कराने के नाम पर भेजा और रोडवेज बस की टिकट कटाकर गाड़ी में बैठा कर गोरखपुर भेज दिया गया।

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यहां आकर स्वयं को अकेला और असहाय पाया, तो बेटी और पत्नी की हरकत समझ में आई। कुछ करने की स्थिति नहीं थी, इसलिए अपनी हालत पर रोने लगा। प्रवर्तन दल की टीम साथ ले गई। प्रवर्तन दल ने शाहपुर के फातिमा बाईपास, बासमंडी स्थित रैन बसेरा में संचालित इस्माइल रोटी संस्था को सौंपा। प्रवर्तन दल ने संस्था के संचालक आजाद पांडेय ने बताया कि संस्था द्वारा बुजुर्ग की देखभाल की जा रही है।