गोरखपुर, जेएनएन। वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से पूरे देश की तरह गोरखपुर में भी इस त्योहार की रौनक फीकी नजर आई। ईदगाहों और शहर की बड़ी मस्जिदों ईद की नमाज पढ़ने की परंपरा रही है। इसमें हजारों लोग शरीक होते रहे हैं, लेकिन इस बार ईदगाहों और मस्जिदों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। पेश इमाम समेत सिर्फ पांच-पांच लोगाें ने नमाज अदा की। लोगों ने घर में ही शुक्रराने के तौर पर चाश्ता की नमाज अदा की और मुल्क में अमन-चैन, तरक्की एवं कोरोना से निजात की दुआएं मांगी।

दूर से ही दी मुबारकबाद

लोगाें ने गले मिलने के बजाए दूर से ही एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। सीधे कहें तो इस बार ईद का उल्लास घरों के अंदर ही सिमट गया है। हालांकि घरों में हमेशा की तरफ सेवइयों के अलावा लजीज पकवान बनाए गए। लॉकडाउन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। ईदगाहों और मस्जिदों के बाहर फोर्स तैनात की गई थी। तीस रोजा रखने के बाद सोमवार को रोजेदारों को ईद मनाने का मौका मिला, लेकिन उनमें उत्साह गायब था। खासकर ईदगाह न जा पाने की वजह से बच्चे निराश नजर आए। सुबह आठ बजे से पहले लोगों ने साफ-सुथरे कपड़े पहने, टोपी व इत्र लगाया और चार रिकात नमाज अदा कर अपने रब का शुकि्या अदा किया। नमाज से पहले फित्रे की रकम गरीबों, यतीमों और परेशान हाल लोगों तक पहुंचाई गई ताकि वह भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें। लॉकडाउन के चलते लोग अपने बुजुर्गों के कब्र पर फातिहा पढ़ने भी नहीं जा सके। हर साल ईदगाहों के बाहर लगने वाला मेला भी नहीं लगा। लोगों ने एक दूसरे के घर जाने से भी परहेज किया।

आपसी सौहार्द मजबूत करने की अपील

ईद की नमाज से पहले ईदगाहों और मस्जिदों के इमाम ने अपनी खास तकरीर में लोगों से दूसरों के दुख-दर्द में शरीक होने, आपसी सौहार्द को मजबूत करने तथा मुल्क में अमन और भरोसे का माहौल बनाने की अपील की। शाही जामा मस्जिद, उर्दू बाजार के पेशइमाम मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी ने कहा कि 30 दिनों तक रमजान में आपने अपनी इच्छाओं पर जिस तरह काबू रखा वह पूरे साल आपके व्यवहार में नजर आना चाहिए। एक सच्चा मुसलमान वहीं होता है जो ताजिदंगी अल्लाह और उनके रसूल के बताए हुए रास्तों पर चलता है। साथ ही गरीबों एवं जरूरतमंदों की मदद करता है।

ईद के दिन सभी यह संकल्प लें कि एक अच्छा और सच्चा इंसान बनने के साथ-साथ मुल्क की खुशहाली एवं तरक्की में अपना योगदान देंगे। मौलाना जुनैद आलम नदवी ने कहा कि रमजान का पाक महीना हमें सच्चा इंसान बनने की सीख देता है। हमें कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जो इंसानियत के खिलाफ हो और अल्लाह को नापसंद हो। मुफ्ती वलीउल्लाह ने कहा कि समाज में जहां हर कोई दौलत के पीछे भागता दिख रहा रहा है। जहां रिश्वत, लूट और भ्रष्टाचार है। ऐसे में ईद की सच्ची खुशी तभी मिल सकती है जब हम सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगाएं और पैसे के नहीं बल्कि अल्लाह के नेक बंद बनें।

Posted By: Pradeep Srivastava

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