यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 11, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
इंसेफ्लाइटिस की रोकथाम को चूहा, छछूंदर पर लगाएंगे प्रभावी नियंत्रण
अब इंसेफेलाइटिस रोग पर नियंत्रण के लिए चूहा नियंत्रण के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है

गोरखपुर : इंसेफ्लाइटिस के कारकों में शामिल चूहा और छछूंदर पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिला कृषि रक्षा विभाग ने लोगों को जागरूक करने का अभियान तेज कर दिया है। विशेष संचारी रोग नियंत्रण पखवारा के तहत विभाग की तरफ से लोगों को जेई व एईएस के लिए जिम्मेदार इन कारणों पर प्रभावी नियंत्रण के उपाय बताए जा रहे हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय यादव ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार दो एक 31 जुलाई तक कृषि विभाग की तरफ से जन-सहभागिता के जरिए चूहा एवं छछूंदर नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में क्षेत्रीय कर्मचारियों एवं जन-सामान्य का सहयोग लेकर प्रचार-प्रसार और इस रोग से होने वाली हानियों, मानवीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों से लोगों को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया इस रोग के प्रसार में चूहा और छछूंदर की भूमिका भी प्रभावी है। इस पर नियंत्रण करके इससे बहुत हद तक बचा जा सकता है। झाड़ियों, कूड़ों, मेड़ आदि की सफाई कर चूहों और छछूंदर पर अंकुश लगाया जा सकता है। चूहेदानी के प्रयोग के साथ ही इनके प्राकृतिक शत्रु सांप, चमगादड़, बाज, उल्लू आदि का संरक्षण करके भी इस पर अंकुश लगाया जा सकता है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि रासायनिक विधि में व्रोमोडिओलान 0.005 फीसद के बने हुए चारे, जिंक फास्फाइड 80 प्रतिशत एक ग्राम मात्रा, एक ग्राम सरसो का तेल एवं 48 ग्राम भूने दाने से बने चारे का प्रयोग करके इन पर नियंत्रण किया जा सकता है। एल्यूमीनियम फास्फाइड 56 प्रतिशत का 3 से 4 ग्राम प्रति किलो में डालकर बिल बंद करना लाभप्रद रहेगा। इन विधियों का प्रचार प्रसार करने के लिए विभागीय कर्मचारियों को लगाया गया है। इन रसायन की उपलब्धता हर विकास खंड पर स्थित कृषि रक्षा इकाइयों पर उपलब्ध है। किसान या जनसामान्य निजी विक्रेताओं से भी यह रसायन खरीदकर चूहों और छछूंदर पर प्रभावी अंकुश लगा सकते हैं।
