गोरखपुर, जेएनएन। अर्बन सीलिंग के एक मुकदमें का मूल रिकार्ड गायब हो गया है। जांच के बाद शुक्रवार को कैंट पुलिस ने अर्बन सीलिंग के पेशकार समेत चार के खिलाफ दस्तावेज चोरी करने का मुकदमा दर्ज किया। इस संबंध में मूल रिकार्ड न मिलने पर हाईकोर्ट ने डीएम को तलब कर लिया है। इसके बाद एफआइआर की कॉपी लेकर जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पाण्डियन हाईकोर्ट रवाना हो गए।

ऐसे हुई जानकारी

हाईकोर्ट के स्थायी अधिवक्ता राहुल मालवीय ने 2008 में दाखिल रिट याचिका विजयनाथ यादव व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य से संबंधित मूल रिकार्ड कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। छानबीन करने पर मूल रिकार्ड नहीं मिला। जिसके बाद डीएम ने दोषी व्यक्तियों के संबंध में आख्या प्रस्तुत करने के लिए अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) और एसडीएम सदर की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया।

सहायक ने नहीं दिया था चार्ज

जांच में पता चला कि भूपेंद्र सहाय (तत्कालीन कर्मचारी अर्बन सीलिंग) के पास पत्रावलियों का चार्ज था। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपने उत्तराधिकारी लिपिक को चार्ज नहीं दिया। जिसके चलते उनका पेंशन रोका गया था।

आरोपितों में सेवानिवृत्त कर्मचारी व शासकीय अधिवक्ता भी शामिल

संबंधित कार्यालय के तत्कालीन सहायक/ नोडल अधिकारी पीयूष पांडेय, पेशकार व पैरोकार बच्‍छलाल और तत्कालीन जिला शासकीय अधिवक्ता समरजीत सिंह दोषी पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर कनिष्ठ सहायक चंदन ने कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

Posted By: Satish Shukla

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