सिद्धार्थनगर : विकास खंड खेसरहा के घोसियारी बाजार में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुडी करीब 20 हजार की जनता स्वास्थ्य महकमा की अनदेखी का खामियाजा भुगत रही है। स्वास्थ्य मंत्री और उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद भी इसकी व्यवस्था नहीं बदली। दूर से देखने पर मरीज खुद संशय में पड़ जाते हैं, कि अस्पताल है या जंगल। शनिवार को यहां फार्मासिस्ट व चिकित्सक दोनों नदारद रहे। वार्ड ब्वाय को देख मरीज बैरंग वापस हो लिए।

वर्ष 2010 में निर्मित यह अस्पताल झाडि़यों के गिरफ्त में है। बीते तीन जून को मुख्य चिकित्साधिकारी डा. संदीप चौधरी ने औचक निरीक्षण कर परिसर में जमा गंदगी व झाडि़यों पर डा. रोहित वर्मा को निर्देशित किया था कि अविलंब सफाई करा दी जाए। बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। अस्पताल पर मौजूद वार्ड ब्वाय बद्री प्रसाद ने बताया कि शनिवार को डाक्टर रोहित वर्मा की तैनाती खेसरहा सीएचसी पर रहती है। फार्मासिस्ट शैलेंद्र चौधरी की एक माह से कोविड सेंटर पर तैनात हैं। एलए लैब टेक्निशियन हेमेंद्र प्रताप 11.30 बजे तक नहीं आए थे। चिकित्सक आवास जर्जर होने से स्वास्थ्य कर्मी रात्रि निवास नहीं करते हैं। ग्रामीण उमाकांत मिश्र ने बताया कि वर्षों से यह अस्पताल उपेक्षित पड़ा हुआ है। कई बार अधिकारियों ने जांच किया उसके बाद भी यहां की समस्या नहीं सुधर रही है। शिव प्रसाद मिश्र ने कहा कि डाक्टर के आने का कोई समय नहीं है। ऐसे में प्राइवेट डाक्टरों से इलाज कराना मजबूरी है। अधिक समस्या पर खेसरहा व बस्ती चले जाते हैं।

सुख्खू लोधी कहना है कि दो चार बार दवा लेने गया हूं। घंटों इंतजार के बाद भी डाक्टर नहीं मिलते थे तो निराश लौट आते थे। अब तो यहां पर जाना ही बंद कर दिए।

प्रदीप कुमार मिश्र का कहना है कि सरकार तो स्वास्थ्य व्यवस्था चुस्त दुरूस्त करने के लिए कटिबद्ध है। लेकिन जब जिम्मेदार ही इस पर अमल नहीं कर रहे, तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा. एमएम त्रिपाठी ने इस संदर्भ में बताया कि अस्पताल की मरम्मत, सफाई एवं प्रसव केंद्र के लिए उच्च अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करा दिया हूं। धन आते ही तत्काल कार्य शुरु करा दिया जाएगा।

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