गोरखपुर, जेएनएन। ग्लैंडर्स एंड फारसी (Glanders and Farcy) जैसी जानलेवा बीमारी से संक्रमित तीन घोड़ों को गुरुवार को दर्द रहित मौत दे दी गई। इस बीमारी को इंसानों के लिए बेहद खतरनाक बताते हुए पशुपालन विभाग ने जिलाधिकारी को रिपोर्ट दी थी, जिस पर डीएम ने घोड़ों को इच्‍छामृत्यु देने की इजाजत दी। पशुपालक को विभाग की तरफ से तीनों घोड़ों के एवज में 75 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

घीसापुर खजुरगांवा के पशुपालक राजेश मौर्य की दो घोड़ी चंपा-चमेली और एक घोड़ा बादल कुछ समय से बीमार थे। पशु चिकित्सकों की जांच में ग्लैंडर्स एंड फारसी का लक्षण मिला तो घोड़ों का ब्लड सैंपल जांच के लिए हिसार स्थित भारतीय अश्व अनुसंधान केंद्र भेज दिया गया। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर इसकी पुष्टि के लिए ब्लड सैंपल को दोबारा हिसार भेजा गया। इस बार भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो घोड़ों को इच्छामृत्यु देने का निर्णय लिया गया। पशुपालन विभाग ने जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पाण्डियन को इसकी रिपोर्ट भेजी, जिस पर उन्होंने अपनी सहमति दे दी।

टीम की देखरेख में दी गई इच्‍छामृत्यु
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. जीके शुक्ला के नेतृत्व में पशु चिकित्साधिकारी डॉ. हरेंद्र प्रकाश चौरसिया, डॉ. उपेंद्र शर्मा व डॉ. सुनील कुमार सिंह गुरुवार को घीसापुर पहुंचे और घोड़ों को मारने के लिए मालिक राजेश मौर्य से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराया। कैम्पियरगंज विद्युत उपकेंद्र के पास वन क्षेत्र में घोड़ों को ले जाकर इंजेक्शन से यूथेलाइज किया गया। इसके बाद जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर उसमें चूना-नमक डालकर घोड़ों को दफन कर दिया गया।

इंसानों के लिए खतरनाक है बीमारी
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीके शुक्ला ने बताया कि ग्लैंडर्स एंड फारसी एक संक्रामक एवं जुनोटिक (जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली) बीमारी है। यह रोग लाइलाज है। इससे ग्रस्त घोड़ों के जिंदा रहने से आसपास के मनुष्यों में भी लाइलाज बीमारी के होने का खतरा बना रहता है। इस में मृत्यु शत-प्रतिशत सुनिश्चित है।

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Posted By: Pradeep Srivastava