गोरखपुर, जेएनएन। पूर्वी उत्तर प्रदेश में डेंगू का शिकंजा कसता जा रहा है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले एक महीने में शहर की सिर्फ एक पैथालॉजी में सौ से अधिक मरीजों में बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। गोरखपुर व आसपास के पैथालॉजी सेंटरों, अस्पतालों व निजी चिकित्सकों के यहां हो रही जांचों को मिला दें तो महीने भर में यह तादाद हजार से अधिक होने का अनुमान है। इसके बाद भी अफसर बेफिक्र हैंं। साफ है यदि स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम के साहब नहीं संभले तो बीमारी तबाही मचाएगी।

शहर के इन इलाकों में हुआ सर्वे

खुद अपर निदेशक स्वास्थ्य ने डेंगू फैलाने वाले मच्‍छरों के बारे में जानकारी लेने के लिए पिछले तीन महीने में गोरखपुर शहर के राप्ती नगर बस डिपो, रामजानकी नगर के सरस्वतीपुरम व ट्रांसपोर्टनगर आदि इलाकों में सर्वे कराया। राप्ती नगर में बड़ी संख्या में पड़े टायरों में पानी जमा था। इसमें भारी तादाद में डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्‍छरों के लार्वा पाए गए। गंभीर यह है दो महीने पहले हुई जांच में बस डिपो में जो स्थिति थी वही मंगलवार को हुए सर्विलांस में पाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक राप्ती नगर बस डिपो में डेंगू के मच्‍छर मिलना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहां दिल्ली-लखनऊ आदि शहरों से यात्री आते हैं जो डेंगू से भी प्रभावित हो सकते हों। एडीज मच्‍छर इनको काटने के बाद वायरस ग्रहण कर तेजी से बीमारी को स्थानीय लोगों में फैलाते हैं।

ट्रांसपोर्ट नगर में डेंगू के लार्वा मिले

इसी तरह ट्रांसपोर्ट नगर में हुए सर्वे में लगभग हर दुकान के सामने रिपेयरिंग के लिए रखे टायरों में डेंगू फैलाने वाले मच्‍छरों के लार्वा मिले। सरस्वतीपुरम में घरों में रखे गमलों व पशुओं को चारा खिलाने वाले नाद में जमा पानी की जांच की गई तो वहां भी लार्वा बहुतायत मिले।जानकारी मिलने पर अपर निदेशक स्वास्थ्य की तरफ से सीएमओ व रोडवेज के अधिकारियों को पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक कोई कारगर कार्रवाई नहीं की गई।

गंभीर हैं हालात : डा. गोयल

महानगर स्थित लाइफ पैथालॉजी में हुई मरीजों की जांच में डेंगू की पुष्टि के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पैथालॉजी के डा.अमित गोयल का कहना है कि पिछले एक महीने से उनकी पैथालॉजी में जांच के दौरान रोजाना चार से पांच मरीजों में बीमारी की पुष्टि हो रही है। सिर्फ महीने भर में यह संख्या सौ के पार पहुंच चुकी है। अब भी रोजाना मरीज पहुंच रहे हैं। डा.गोयल का कहना है कि उन्होंने पीसीआर (पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) व एलाइजा दोनों विधियों से पुष्टि होने के बाद ही रिपोर्ट जारी की है।

तो भयावह होंगे हालात : डा. मंगलेश

गोरखपुर पैथालॉजिस्ट एसोसिएशन के सचिव व वरिष्ठ पैथालॉजिस्ट डा.मंगलेश श्रीवास्तव का कहना है कि उनकी पैथालॉजी में एक महीने में करीब 30 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। अब भी मरीजों का आना जारी है। गोरखपुर में 37 पैथालॉजी सेंटर पंजीकृत हैं। इसके अलावा अनेक डाक्टर व अस्पताल खुद भी जांच करवाते हैं। ऐसे में मरीजों की तादाद कितनी ज्यादा है यह सहज समझा जा सकता है। गनीमत यह है कि इस बार डेंगू खतरनाक नहीं है। यदि वायरस ने रूप बदला और बीमारी हेमरेजिक हुई तो तबाही मच जाएगी।

निरोधात्‍क कार्यवाही के निर्देश

अपर निदेशक स्वास्थ्य, गोरखपुर मंडल डा. जनार्दन मणि त्रिपाठी का कहना है कि महानगर के राप्ती नगर बस डिपो व अन्य स्थानों पर कराए गए सर्वे में जगह-जगह डेंगू के लार्वा मिले हैं। सीएमओ व रोडवेज के अधिकारियों को निरोधात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी आंकड़े की बात है तो जनवरी से अबतक तीस मरीजों में बीमारी की पुष्टि हुई है। जहां तक निजी पैथालॉजी व अन्य अस्पतालों में मरीज मिलने की बात है तो इसकी जांच कराई जाएगी। 

Posted By: Satish Shukla

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