गोरखपुर, जेएनएन : बस्ती जिले में ब्लाकों में स्थित मतगणना केंद्रों के बाहर मतगणना के दौरान भीड़ लगाना लोगों को भारी पड़ा है। जिले के तीन थानो में पुलिस ने 375 अज्ञात लोगों के विरुद्ध भादवि और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

प्रत्‍याशी और समर्थक उड़ाने लगे अबीर-गुलाल

रुधौली थाने के उपनिरीक्षक श्रीहरि राय ने अपने तहरीर में बताया कि सब्जी मंडी परिसर में बने मतगणना स्थल पर उनकी ड्यूटी थी। चुनाव परिणाम बारी-बारी से सुनाया जा रहा था कि अचानक एक चुनाव परिणाम सुनाए जाने पर करीब 150 की संख्या में व्‍यक्तियों ने जिसमें की प्रत्याशी, उनके एजेंट व समर्थक इत्यादि थे, जश्न मनाते हुए अबीर-गुलाल उड़ाने लगे। जनपद में कोविड़-19 के बढ़ते संक्रमण की वजह से धारा 144 लागू है। ऐसे में इन व्यक्तियों द्वारा आचार संहिता व कोविड-19 के गाइड लाइन का उल्लंघन किया गया। मामले में पुलिस ने 150 व्यक्ति नाम पता अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है।

भानपुर में हुआ कोविड 19 के नियमों का उल्‍लंघन

इसी प्रकार सोनहा थाने के प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सिंह ने किसान इंटर कालेज भानपुर में मतगणना के समय प्रत्याशियों के तकरीबन 150 समर्थक नाम पता अज्ञात बाहर भीड़ लगाए थे। इससे कोविड-19 के गाइड लाइन का उल्लंघन हुआ। मामले में सभी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। इसी प्रकार कप्तानगंज स्थित मतगणना स्थल इंदिरा गांधी इंटर कालेज के बाहर धारा 144 लागू होने के बाद भी तकरीबन 75 लोग एकत्र होकर कोरोना महामारी के संबंध में जारी गाइडलाइन का  उल्लंघन कर रहे थे। प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह की तहरीर पर सभी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।

मतदाताओं ने नए चेहरों पर जताया भरोसा

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना समाप्त हो चुकी है, लेकिन यह परिणाम गंवई राजनीति के लिए चौंकाने वाली साबित हुई है । मतदाताओं ने गांव के पुराने दिग्गजों को किनारे कर दिया है। गांव के सत्ता की चाबी अधिकतर युवाओं के हाथ में सौंपी है। कई बार प्रधान रह चुके कई दिग्गजों को मुंहकी खानी पड़ी है। उल्लेखनीय है कि विकास खंड के 86 ग्राम पंचायतों में मात्र 13 पूर्व प्रधान ही चुनाव जीतकर वापस गांव की राजनीति संभालेंगे। स्थिति यह है कि गांव में अपना अधिपत्य समझने वाले कई दिग्गजों को जनता द्वारा दिए गए फैसले पर विश्वास नहीं हो रहा है। विकास खंड में करीब अस्सी फ़ीसदी चुने गए जनप्रतिनिधि 25 साल से लेकर 45 साल के बीच में है, जिससे लगता है कि मतदाताओं को पुराने पीढ़ी के लोगों का गांव की राजनीति करना रास नहीं आ रहा है और उन्होंने युवाओं को सत्ता की बागडोर सौंप दी है।

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