गोरखपुर, जेएनएन। Coronavirus के बाद हुए लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज के और संबंधित अन्‍य अधिकारियों की चूक अब भारी पड़ रही है। अधिकारियों ने गलती पर गलती की और परिणाम सामने है।

केस एक

महराजगंज के नौतनवां निवासी अमिनुलहक पत्नी जुबैदा खातून को लेकर छह अप्रैल की रात गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। मेडिसिन विभाग में जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सुपर स्पेशलिटी में बने आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया। थोड़ी देर बाद उनकी मौत हो गई। कोरोना संक्रमण की जांच के लिए उनका सैंपल नहीं लिया गया।

केस दो

कुशीनगर के भगवानपुर खुर्द ग्राम सभा के पूर्व प्रधान सिराजुद्दीन अंसारी को सांस में तकलीफ व सीने में दर्द था। सात अप्रैल की रात करीब नौ बजे परिजन उन्हें लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। डॉक्टरों ने उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर दिया। थोड़ी देर बाद उनकी मौत हो गई। कोरोना संक्रमण की जांच के लिए इनका भी सैंपल नहीं लिया गया।

भारी पड़ी लापरवाही

बस्ती जिले के युवक हसनैन की मौत के बाद भी बाबा राघवदास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सबक नहीं लिया और दूसरी, फिर तीसरी बार गलती कर दी। आइसोलेशन वार्ड में बीते सोमवार व मंगलवार की रात भर्ती एक-एक मरीज की मौत हो गई। उन्हें सांस फूलने की बीमारी थी। बावजूद इसके कोरोना संक्रमण की जांच के लिए न इलाज से पहले उनका सैंपल लिया गया और न ही मौत के बाद। संकट की घड़ी में ऐसी लापरवाही आमजनमानस को बड़े खतरे में डाल देगी। साथ ही सरकार की मंशा पर भी पानी फिर जाएगा।

मौत के बाद पता चला कि कोरोना संक्रमित है हसनैन

बीते 30 मार्च को बस्ती के युवक हसनैन की मौत के बाद सैंपल नहीं लिया गया होता, तो अब तक बस्ती व गोरखपुर जिले के अनेक लोग कोरोना संक्रमित होते, क्योंकि उसके संपर्क में आए आठ लोग संक्रमित पाए गए हैं। इनमें एक व्यक्ति गोरखपुर का है। उसे भी बस्ती जिले में ही आइसोलेट कर दिया गया है। हसनैन की जांच रिपोर्ट दो दिन बाद आई। तब तक उसका अंतिम संस्कार हो चुका था और जनाजे में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। सभी को चिह्नित कर क्वारंटाइन किया गया। उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों को भी क्वारंटाइन किया गया। यदि हसनैन का सैंपल समय से ले लिया गया होता तो जनाजे में शामिल लोगों सहित एंबुलेंस के चालक व उसके साथियों को क्वारंटाइन नहीं कराना पड़ता। वे परेशानी से बच सकते थे। मेडिकल कॉलेज की एक चूक बड़ी संख्या में लोगों पर भारी पड़ी। इसके बाद भी कॉलेज प्रशासन लगातार चूक करता जा रहा है।

महराजगंज व कुशीनगर के मरीजों में कोरोना के लक्षण नहीं थे। इसलिए उनका सैंपल नहीं लिया गया था। सांस से संबंधित सभी रोगियों को वहीं भर्ती किया जा रहा है, इसलिए उन्हें भी भर्ती किया गया था। अब निर्णय लिया गया है कि आइसोलेशन वार्ड में जो भी मरीज भर्ती होगा, कोरोना संक्रमण की जांच के लिए उसका सैंपल लिया जाएगा। - डॉ. गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज

Posted By: Pradeep Srivastava

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