गोरखपुर, जेएनएन। कोरोना की दहशत के बीच कुछ दवाएं बहुत कामन हो गई हैं। मेडिकल स्टोर वालों को भी पता है कि इसमें कौन सी दवा देनी चाहिए। लेकिन यह खतरनाक भी साबित हो रही है। ज्यादातर लोग अपने मन से मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा रहे हैं और कुछ ही दिन में उनकी स्थिति ज्यादा गंभीर हो जा रही है। विशेषज्ञों ने डाक्टर से परामर्श लेकर ही दवा खाने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग भी दवाएं होम आइसोलेट मरीजों को पहुंचा रहा है। लेकिन मरीजों की काउंसिलिंग नहीं की जा रही है। ऐसे में वे दवा खाते जा रहे हैं। 

ऐसे बिगड़ती है स्थिति

आक्सीजन का स्तर कम होने के बाद भी वे वही दवा खा रहे हैं और गंभीर होते जा रहे हैं। अनेक मरीज इस तरह के आए जिनमें बहुत ही सामान्य लक्षण थे, वे कोरोना के मरीज भी नहीं थे लेकिन मेडिकल स्टोर से दवा लेकर उन्होंने अपना मर्ज बढ़ा लिया और खांसी बढ़ गई। सीटी स्कैन कराने पर उनका सीटी वैल्यू 7/25 मिला। खैर गनीमत थी, यही वैल्यू यदि सात की जगह 11 से अधिक होती तो आक्सीजन की कमी होने लगती और स्थिति गंभीर हो जाती। जो लोग पांच से सात दिन में ठीक हो सकते थे, उन्हें ठीक करने में 15 दिन लगे। इसके बाद भी अभी एक माह दवा चलेगी तब पूरी तरह स्वस्थ होंगे। ऐसे में डाक्टरों से परामर्श किए बिना दवा खाना खतरे से खाली नहीं है।

खराब हुई कई मरीजों की स्थिति

अनेक मरीज इस तरह के आए जो अपने मन से दवा खा रहे थे, उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी। पूछने पर उन्होंने बताया कि अधिकतर डाक्टरों ने ओपीडी बंद कर दी है। वे करें क्या? ऐसे में एम्स, बीआरडी, जिला अस्पताल व अनेक निजी डाक्टर आनलाइन उपलब्ध हैं, उनसे परामर्श लिया जा सकता है। बिना परामर्श के दवा कतई न खाएं। यदि स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई दवा खा भी रहे हैं तो आक्सीजन का स्तर देखते रहें, कम होते ही तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। - डा. वीएन अग्रवाल, सीना रोग विशेषज्ञ

अब तो दवाओं के पर्चे छपवाकर बांटे जा रहे हैं। लेकिन हर मरीज को एक ही दवा फायदा नहीं पहुंचा सकती। कुछ ठीक हो जाते हैं और वही दवा खाकर कुछ गंभीर हो जा रहे हैं। इसलिए डाक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। चिकित्सक यह बात जानते हैं कि किस लक्षण में कौन सी दवा दी जाए। एक ही तरह के लक्षण होने पर भी दो मरीजों को अलग-अलग दवाएं दी जाती हैं। बिना परामर्श के बुखार होने पर केवल प्लेन पैरासीटामाल खाया जा सकता है। - डा. अश्विनी मिश्रा, अध्यक्ष, टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कालेज।

Edited By: Pradeep Srivastava