गोरखपुर, (जेएनएन)। प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के दावे के बावजूद आउटसोर्सिग के सभी कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान नहीं हुआ। जिम्मेदारों का दावा था कि दीपावली से पहले सभी का मानदेय उनके खाते में पहुंच जाएगा, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी दावा गलत साबित हुआ।
मानदेय न मिलने से कर्मचारियों की दीपावली फीकी हो गई। जबकि कर्मचारी पहली नवंबर से ही ठेकेदार के कार्यालय का चक्कर लगा रहे थे। जबसे महानगर में सफाई व्यवस्था बदली है तबसे सफाई कर्मियों को मानदेय समय से नहीं मिल रहा है। इसे लेकर कई बार सफाई कर्मी आंदोलन कर चुके हैं। दो बड़े त्योहारों पर मानदेय न मिलने से वे आक्रोशित हैं और किसी दिन भी हड़ताल पर जा सकते हैं। दूसरी तरफ भुगतान को लेकर शासन की सख्ती के बावजूद ठेकेदार और नगर निगम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
ठेका लेने वाली एजेंसी के जिम्मेदारों का स्पष्ट कहना है कि निगम की ओर से जितने कर्मचारियों की हाजिरी सत्यापित की गयी, उन सबके खाते में मानदेय पहुंच चुका है। हालांकि इस पर सवाल उठ रहे हैं। हाजिरी के सत्यापित न होने से आ रही समस्या एजेंसी के कर्मचारी सफाई कर्मियों की हाजिरी लेने के बाद उसे सत्यापित करने के लिए नगर निगम के सुपरवाइजरों को सौंप देते हैं। इसके बाद जितने कर्मचारियों की हाजिरी सत्यापित होती है उतने को भुगतान किया जाता है, लेकिन बहुत से कर्मचारियों को पूरे माह कार्य करने के बाद भी भुगतान नहीं मिला।
वहीं कई को 15 दिन का ही मानदेय मिला है। अलहदादपुर के पार्षद आनन्द वर्धन का कहना है कि उनके वार्ड में 30 फीसद कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिला, जबकि उन्होंने पूरे महीने कार्य किया है। यही स्थिति कमोवेश अधिकांश वार्डो की है। तय धनराशि से कम मिल रहा मानदेय आउटसोर्सिग के सफाई कर्मियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ बहुत से कर्मचारी भुगतान न मिलने से परेशान हैं तो दूसरी तरफ ऐसे सैकड़ों कर्मचारी हैं जिन्हें कम मानदेय मिला है।
सूरजकुंड, शेषपुर, रसूलपुर, पुराना गोरखपुर, शक्तिनगर समेत दर्जनों वार्डो में सैकड़ों कर्मचारियों को एक हजार से लेकर दो हजार रुपये तक कम मानदेय मिला है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर सुपरवाइजर और अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। दीपावली के दिन बांटा नगद सफाई का ठेका लेने वाली विशाल प्रोटेक्शन फोर्स के जय प्रकाश सिंह ने बताया कि कुछ कर्मचारियों ने भुगतान नहीं होने की शिकायत की थी।
इसके बाद खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए दोबारा बैंक में पैसा भिजवाया गया, लेकिन बैंक बंद होने के कारण पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका। कुछ ऐसे भी कर्मचारी थे जिनका कहना था कि उन्हें मानदेय नहीं मिल रहा है। सुपरवाइजर के अनुरोध पर दीपावली के दिन उन्हें नकद भुगतान किया गया।