गोरखपुर, जेएनएन। स्वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांवों में शौचालय बनाने के नाम पर जारी धनराशि में भी जमकर खेल हुआ है। नियमों को दरकिनार कर लाभार्थियों को नकद धनराशि दे दी गई। इतना ही नहीं लाभार्थियों को शौचालय की आधी-अधूरी धनराशि दी गई जबकि लाभार्थियों ने शौचालय का निर्माण पूरा करा लिया है। इस पूरे मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में है। अगर लाभार्थियों को शौचालय का अनुदान नकद दिया गया तो इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई? जनपद में करीब एक लाख से अधिक लाभार्थी हैं जिनके शौचालय अधूरे हैं और उनके हिस्से की धनराशि निकाल ली गई है।

सिर्फ शौचालय निर्माण के लिए छह अरब 32 करोड़ खर्च

स्वच्‍छ भारत मिशन के तहत जनपद में 5,27,319 शौचालयों के निर्माण के लिए छह अरब 32 करोड़ 78 लाख 28 हजार रुपये का आवंटन किया गया। विभाग का दावा वर्ष 2014-15 में 14382 शौचालय निर्माण कराने का है। इन पर 17 करोड़ 25 लाख 84 हजार रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2015-16 में 17394 शौचालयों के निर्माण पर 20 करोड़ 87 लाख 28 हजार रुपये व्यय हुए। 16-17 में 30716 शौचालयों के निर्माण पर 36 करोड़ 85 लाख 92 हजार रुपये खर्च किए गए। इसी तरह वर्ष 17-18 में सर्वाधिक 265750 शौचालयों का निर्माण कराया गया। इनके निर्माण के लिए तीन अरब 18 करोड़ 90 लाख रुपये की धनराशि ग्राम पंचायतों के खाते में भेजी गई। 18-19 में 199077 शौचालयों का निर्माण हुआ, जिस पर 2 अरब 38 करोड़ 89 लाख 24 हजार रुपये व्यय दिखाया गया। इस मामले में पूछे जाने पर डीपीआरओ ने चुप्पी साध ली और कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।

फंसता जा रहा है डीपीआरओ कार्यालय

डीपीआरओ कार्यालय अपने ही बुने जाल में फंसता जा रहा है। जनपद की 1352 ग्राम पंचायतों में यह धनराशि 2012 में कराए गए बेसलाइन सर्वे के आधार पर भेजी गई थी। अब सवाल यह उठता है कि जब सर्वे किया गया तो उस समय जो पात्र नहीं थे ऐसे लोगों के नाम सूची में कैसे जुड़ गए? दूसरी बात कि शौचालय निर्माण की धनराशि दो किस्तों में खाते में ही भेजने का नियम है तो पहली किस्त की धनराशि नकद क्यों दी गई और जब शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हुआ तो दूसरी किस्त की धनराशि कहां गई? विकास खंड गगहा के बेलसड़ा गांव की चौहान बस्ती में शिवकुमार, चंद्रशेखर, बाबूराम, विनोद, मनोज, सुभाष, विजय आदि समेत दर्जनों ऐसे लोग हैं जिनके शौचालय अधूरे पड़े हैं।

अब भी जमे हैं सतीश चौरसिया

डीपीआरओ कार्यालय में पिछले 11 सालों से बाबू के रूप में संबद्ध ग्राम पंचायत अधिकारी सतीश चौरसिया को अभी तक नहीं हटाया गया है। नियमों के मुताबिक ग्राम पंचायत अधिकारी को डीपीआरओ कार्यालय में संबद्ध नहीं किया जा सकता है। मुख्य विकास अधिकारी हर्षिता माथुर ने भी ग्राम पंचायत अधिकारी सतीश चौरसिया को हटाकर विकास खंड में भेजने का निर्देश दिया था लेकिन डीपीआरओ ने उन्हें अभी तक नहीं हटाया है।

भ्रष्‍टचार बर्दाश्‍त नहीं

इस संबंध में जिलाधिकारी  के. विजयेंद्र पाण्डियन का कहना है कि शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की जांच के आदेश दिए गए हैं। जिला पंचायती राज कार्यालय में पिछले 11 साल से संबद्ध ग्राम पंचायत अधिकारी सतीश चौरसिया के प्रकरण की भी जांच कराई जा रही है। जल्द ही इस प्रकरण में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

Posted By: Satish Shukla

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