प्रदीप श्रीवास्‍तव, गाेरखपुर। कांग्रेस ने यूपी इकाई के पुनर्गठन में जमीनी नेताओं को तरजीह देकर स्‍पष्‍ट संदेश दिया है कि अब कांग्रेस बदल रही है। पिछली कांग्रेस कमेटी लगभग 500 लोगों की थी, लेकिन नई कमेटी 41 लोगों की है। नई कमेटी में जनाधार वाले संघर्षशील कार्यकर्ताओं को जगह मिली है। जिसमें कई नए चेहरे भी शामिल हैं। कांग्रेस के नए संगठन से साफ-साफ दिख रहा है कि उत्तर प्रदेश की सड़कें जनांदोलनों से खाली नहीं होंगी। प्रियंका गांधी ने सोनभद्र, उन्नाव और शाहजहांपुर कांड में अपनी सक्रियता दिखाकर पहले ही साफ कर दिया था कि आने वाली कांग्रेस सड़कों पर लड़ती दिखेगी।

कांग्रेस का जुझारू चेहरा हैं विश्‍वविजिय

पूर्वांचल में कांग्रेस के जुझारू चेहरा के रूप में जाने जाने वाले विश्वविजय सिंह को प्रदेश का महासचिव बनाकर प्रियंका गांधी से साफ संदेश दिया है कि कांग्रेस अब सड़क पर उतर कर संघर्ष करने वाले लोगों को लेकर आगे बढ़ने वाली है। 90 के दसक में गोरखपुर के दिग्विजय नाथ पीजी कालेज छात्र संघ के अध्यक्ष रहे और एनएसयूआई के जरिये गोरखपुर विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में धमक रखने वाले विश्‍वविजय सिंह बाद के दिनों में आमी बचाओ आंदोलन को लेकर पूरे देश में चर्चित हुए थे और आमी नदी को बचाने के पिछले कई वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं। उनके आंदोलन का असर था कि उनके आह्वान पर राहुल गांधी भी आमी की दशा देखने गोरखपुर आए थे। इस आंदोलन के चलते विश्‍वविजय सिंह कई बार जेल गए। असर यह हुआ कि गीडा की कई फैट्रियों को आमी में जहरीला पानी छोड़ना बंद किया।

युवाओं को भी तरजीह

कांग्रेस हाई कमान ने उत्तर प्रदेश में अपना भरोसा नौजवानों पर जताया है। यूपी कांग्रेस की नई कमेटी की औसत आयु लगभग 40 साल है। साथ ही साथ वरिष्ठ नेताओं को भी स्थान दिया है। युवाओं को प्रतिनिधित्व देने का संकेत उपचुनाव की रणनीति से साफ हो गया है कि प्रियंका की पसंद नौजवान लीडरशिप में है। कांग्रेस ने उपचुनाव में युवाओं को मौका दिया अब संगठन में भी युवा नेतृत्व को मौका मिला है।

जातीय दबदबा नहीं बल्कि समावेशी जातीय समीकरण

कमेटी में इस बार जातीय समावेशी फार्मूले को साधा गया है। कमेटी में लगभग 45 फीसदी पिछड़ जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। पिछड़ी जाति में भी हशिए पर खड़ी अतिपिछड़ी जातियों पर ज्यादा फोकस किया गया है। दलित आबादी को करीब 20 फीसदी का नेतृत्व दिया गया है। इस नेतृत्व में प्रभुत्वशाली दलित जातियों के अलावा अन्य जातियों को भी नेतृत्व का मौका मिला है। मुस्लिम नेतृत्व करीब 15 फीसदी है। जिसमें पसमांदा मुस्लिम कयादत पर भी जोर दिया गया है। नई कांग्रेस कमेटी में लगभग 20 फीसदी सवर्ण जातियों का प्रतिनिधित्व है। कांग्रेस ने जातीय समीकरण को समावेशी जातीय प्रतिनिधित्व के फार्मूले से साधने की कोशिश की है। कमेटी में महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है।

जमीनी रिपोर्ट पर तैयार हुई है नई कमेटी

सूत्र बताते हैं कि लगभग चार माह से कांग्रेस की कई टीमें उत्तर प्रदेश की खाक छान रहीं थीं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी खुद उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं, नेताओं और बुद्धिजीवियों के साथ बैठक करके सलाह मशविरा ले रहीं थीं। उत्तर प्रदेश में छः राष्ट्रीय सचिव लगातार पूरे प्रदेश का भर्मण कर रहे थे। प्रियंका गांधी के टीम के लोग जिले -जिले घूमकर जमीनी पड़ताल कर रहे थे।

विश्वविजय पर जताया भरोसा

कांग्रेस आलाकमान द्वारा गोरखपुर के विश्वविजय सिंह के कमेटी का महासचिव बनाये जाने पर गोरखपुर के जमीन से जुड़े कांग्रेसी गदगद हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने जिस तरह नौजवान नेताओं को संघर्ष की कमान सौंपी है, उससे कार्यकर्ताओं में उत्साह और उर्जा का संचार हुआ है। विश्व विजय सिंह विद्यार्थी राजनीति और जन संघर्षों की उपज हैं, अब सरकार के जनविरोधी कार्यों के खिलाफ जनांदोलन को गति मिलेगी।

इन लोगों ने दी बधाई

कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री तलत अजीज, डाक्टर सुरहीता करीम, दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव, डाक्टर भानु प्रताप सिंह, पूर्व मेयर पवन बथवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, पूर्व विधायक हरिद्वार पान्डेय, लाल चंद निषाद, शरदेंदु पान्डेय, आलोक शुक्ल, डाक्टर अजीज अहमद, मधुसूदन त्रिपाठी एडवोकेट, डाक्टर विजाहत करीम, सुरसरि मिश्र, बीएस सिंह, जवाहर सिंह,  नागेन्द्र प्रताप सिंह मुन्ना, संजय सिंह, डाक्टर रूप कुमार सिंह, नरेंद्रजीत सिंह छोटे, विनोद जोजफ, तौकीर आलम, महेन्द्र मोहन तिवारी, कृष्ण बिहारी दूबे, डाक्टर अखलाक अहमद, अजय सिंह, इंद्रजीत सिंह लीडर, शकील अहमद, विवेक श्रीवास्तव, कालन्जय तिवारी, सुमित पान्डेय, अरुण अग्रहरी, मदन तिवारी, सैयद जमाल अहमद, संजीव सिंह सोनू, गोरखलाल श्रीवास्तव, मोहम्मद हसन, जयगोविन्द यादव आदि ने विश्‍वविजय सिंह को बधाई दी है।

Posted By: Pradeep Srivastava

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