गोरखपुर, जेएनएन। प्रदेश सरकार के निशाने पर आए सिंचाई विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा जनपद में बतौर मुख्य अभियंता गंडक के रूप में लगभग 14 माह तक तैनात रहे। उनकी मुख्य अभियंता के रूप में 18 नवंबर 2014 को तैनाती हुई और वह 25 जनवरी 2016 तक इस पद पर रहे। इस दौरान उनके ऊपर कई आरोप लगे।

तीन माह के भीतर जांच रिपोर्ट देने का हुआ था निर्देश

गंडक में लगभग 35 करोड़ रुपये की आमंत्रित निविदा के मामले में कुछ लोगों ने लोकायुक्त से शिकायत की। लोकायुक्त ने पूरे मामले की तीन माह के भीतर जांच का निर्देश दिया था। इस मामले में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल मुकुल कुमार जैन व अधीक्षण अभियंता सिंचाई कार्य मंडल-दो पीसी यादव द्वारा निकाली गई निविदा की भी जांच की गई।

शासन स्‍तर से नहीं हुई कार्रवाई

जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई लेकिन शासन स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा तत्कालीन मुख्य अभियंता गंडक भूपेंद्र शर्मा पर कई अनुबंध व मानक के विपरीत कार्य कराने का आरोप भी लगा था। इन सभी मामलों की जांच सिंचाई विभाग के तत्कालीन विशेष सचिव सुरेंद्र विक्रम द्वारा की गई।

अब सीएम ने सतर्कता जांच का दिया आदेश

साथ ही विशेष सचिव सुरेंद्र विक्रम ने इस मामले की खुली सर्तकता जांच की संस्तुति की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूपेंद्र शर्मा की सेवानिवृत्ति से 10 साल पहले तक इनके द्वारा कराए गए कार्यों की सतर्कता जांच के आदेश दिए हैं।

ये हैं आरोप

गंडक परियोजना में 35 करोड़ का अनियमित भुगतान,  मुख्य अभियंता गंडक के पद पर रहते हुए अनेक अनुबंध व कार्यों को बिना मानक कार्य कराने का आरोप। ललितपुर में भौरट बांध परियोजना पर पक्के कार्य का 50 करोड़, मिट्टी कार्य का 26 करोड़ व पौधारोपण के मद में 16 करोड़ के अनियमित भुगतान का मामला। 4000 बोरी सीमेंट प्रयोग के अभाव में जम गई इससे सरकार को 25 लाख की क्षति हुई। 

Posted By: Satish Shukla

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