'सनातन धर्म की एकता में ही समाज की सुरक्षा, बंटेंगे तो दुर्गति होगी'; गोरखपुर में बोले सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म की एकता ही समाज की सुरक्षा और मजबूती का आधार है।

सीएम योगी आदित्यनाथ
HighLights
सनातन धर्म की एकता समाज की सुरक्षा और मजबूती का आधार।
महंत दिग्विजयनाथ का राम मंदिर व शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान।
रामभक्तों को भ्रम फैलाने वालों को पहचानने की दी सलाह।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म की एकता में ही समाज की सुरक्षा और मजबूती निहित है। पंथ और संप्रदाय की उपासना पद्धतियां भले अलग हों, लेकिन सभी का कल्याण वृहद सनातन धर्म की मजबूती में है।
140 करोड़ लोग यदि एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत उनके सामने नहीं ठहर सकती। अलग-अलग गति प्रगति का नहीं, दुर्गति का कारण बनेगी और अलग-अलग स्वर ताकत नहीं बल्कि पराजय का कारण बनेंगे।
मुख्यमंत्री मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित सप्त दिवसीय समारोह के तहत व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दोनों आचार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान और दूरदर्शी कार्यों को याद किया।
रामभक्तों को भ्रम फैलाने वालों को पहचानना होगा
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम और सनातन के वैभव को जो लोग स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, वे दुष्प्रचार और भ्रम का सहारा लेंगे। उन्होंने हनुमान जी के संजीवनी बूटी लाने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह हनुमान जी ने कालनेमि को पहचान लिया था, उसी तरह रामभक्तों को भी भ्रम फैलाने वालों को पहचानना होगा।
उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ भारत की स्वतंत्रता को केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं मानते थे। उनके लिए सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी उतनी ही आवश्यक थी। उनका मानना था कि यदि सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है तो अयोध्या में भी यह कार्य होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ, बाबा अभिराम दास और महंत रामचंद्र दास परमहंस सक्रिय थे। इसकी रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी। आज 500 वर्षों बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर सनातन धर्मावलंबियों को गौरव की अनुभूति करा रहा है।
शिक्षा और सामाजिक समरसता के लिए भी किया काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और विंध्यवासिनी धाम का भव्य स्वरूप सामने आया है। प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया के सामने सनातन परंपरा की सामर्थ्य को प्रस्तुत किया। उन्होंने वृंदावन के वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख किया।
योगी ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने बिखरे नाथ संप्रदाय को अखिल भारतीय भेष बारह पंथ योगी महासभा के रूप में एकजुट किया। अपनी परंपरा का पालन करते हुए वृहद सनातन धर्म की एकता को मजबूत करना होगा।
उन्होंने कहा कि देश की गुलामी के दौर और संसाधनों के अभाव के बीच महंत दिग्विजयनाथ ने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। महाराणा प्रताप को आदर्श बनाने के पीछे स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म की भावना थी। गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्वविद्यालय के लिए मठ की संपत्ति और दो संस्थाएं सरकार को देने में उन्होंने श्रेय की चिंता नहीं की।
आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत 50 से 55 संस्थाएं संचालित हैं। इनमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, विद्यालय, अस्पताल और कृषि विज्ञान केंद्र शामिल हैं। महंत दिग्विजयनाथ ने बालिका शिक्षा के लिए विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित किए। गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाने और बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ नाथ परंपरा की पीठ होने के बावजूद पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहां जाति, पंथ और संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं होता। सभी जातियों के लोग एक पंक्ति में भोजन करते हैं और आचार्यों व संतों को समान सम्मान दिया जाता है।
अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य ने महंत दिग्विजयनाथ के शिक्षा, स्वास्थ्य और भारतीय परंपरा के क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया। काशी के जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल दास वेदांती ने कहा कि संत की साधना तभी सार्थक है, जब उससे लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त हो।
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि 1932 में बोया गया शिक्षा का बीज आज विशाल स्वरूप ले चुका है।
कार्यक्रम में डॉ. रामनरेश पांडे की पुस्तक ‘श्री हनुमत् कथा पूजनम्’ का मुख्यमंत्री योगी और संतों ने विमोचन किया। इस अवसर पर जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य, महंत बालकनाथ योगी, महंत योगी चेताईनाथ, जगद्गुरु संतोषाचार्य सतुआ बाबा और महंत मिथिलेशनाथ मौजूद रहे।
