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स्वप्न सरीखा बदलाव, आज गोरखपुर को मिलेगा विकास का 'फ्लाईओवर'

By Bhaskar SinghEdited By: Vivek Shukla
Published: Thu, 23 Jul 2026 08:17 AM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में 2.65 किलोमीटर लंबे सिक्सलेन फ्लाईओवर का लोकार्पण किया, जिससे शहर के विकास को नई ...और पढ़ें

तिरंगे की रोशनी में नहाया ट्रांसपोर्ट नगर से पैडलेगंज की तरफ बना शहर का पहला सिक्सलेन फ्लाईओवर पूरी तैयार है।-संगम दूबे

तिरंगे की रोशनी में नहाया ट्रांसपोर्ट नगर से पैडलेगंज की तरफ बना शहर का पहला सिक्सलेन फ्लाईओवर पूरी तैयार है।-संगम दूबे

HighLights

  1. मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर में 2.65 किमी सिक्सलेन फ्लाईओवर का उद्घाटन किया।

  2. यह फ्लाईओवर शहर की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को गति देगा।

  3. गोरखपुर का इन्फ्रास्ट्रक्चर अब राजधानी लखनऊ जैसा हो गया है।

भाष्कर सिंह, गोरखपुर। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2.65 किलोमीटर लंबे सिक्सलेन फ्लाईओवर का जब लोकार्पण करेंगे तो एक शहर के रूप में गोरखपुर विकास के एलिवेटेड हाईवे पर दौड़ने के लिए तैयार हो जाएगा। विकास की यह यात्रा कितनी कठिन रही, इसे तो हर नागरिक स्वयं जानता है। इसी धरती की संतान हूं, लेकिन पिता जी के सरकारी सेवक होने के नाते अधिकतर समय बाहर ही बीता।

आज भी अच्छी तरह याद है कि जब रेलवे स्टेशन पर उतरते थे, तो शाम तक अपने गांव पहुंचने की जल्दी होती थी। तब वह जल्दी समझ नहीं आती थी। पैडलेगंज से बस मिलती थी या फिर कचहरी से अवैध रूप से चलने वाले चौपहिया। उदास सी पतली सड़कें, लेकिन वाहनों में जानवरों की तरह भरी सवारी। नौसढ़ तक पहुंचना ही किसी उपलब्धि से कम नहीं था।

इसके बाद गांव का सफर तो मानो युद्ध जैसा ही था। बाल मन इस यात्रा से बचना चाहता था, क्योंकि यात्रा बहुत कष्टकारी होती थी। 36 किमी की यात्रा में तीन घंटे तो लग ही जाते थे, जो ट्रेन यात्रा की थकावट के बाद किसी कड़ी सजा जैसा था। चमकते-जगमगाते सिक्सलेन फ्लाईओवर को देखकर पुरानी यादें जीवंत हो गईं, समय जैसे रुक गया।

1990 से लेकर अब तक का गोरखपुर आंखों के सामने से चंद क्षणों में गुजर गया। विश्वास नहीं हो रहा था कि यह वही गोरखपुर है, लेकिन सत्य तो यही है कि गोरखपुर बदल चुका है। तमाम लोग मिले, शहर के बारे में बात करते हुए एक वाक्य तो सभी बोलते हैं, लखनऊ में जो कुछ भी बड़ा-अच्छा है महाराज जी (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) ने वो सब कुछ गोरखपुर को दे दिया। हमारी सड़कें भी अब राजधानी जैसी हो गई हैं।

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निश्चित रूप से ऐसी ही भावना जनसामान्य की भी होगी। दशकों से पूर्वांचल की राजधानी जैसी उपमा गोरखपुरवासी अपने प्यारे शहर को देते रहे हैं, भावना के स्तर पर यह उपमा उनके लिए आज थोड़ी और गहरी हो गई। नौसढ़ की तरफ से लखनऊ और वाराणसी हाईवे से आने वाला ट्रैफिक तीव्र गति से शहर में प्रवेश करेगा तो लखनऊ-वाराणसी के सफर की शुरुआत जाम से नहीं होगी।

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राप्ती का नया पुल जब तैयार हो जाएगा तो परिदृश्य और बदल जाएगा। मेडिकल कालेज रोड हो या देवरिया रोड, खजांची फ्लाईओवर हो या निर्माणाधीन जेल बाईपास मार्ग, सब शहर को बदल रहे हैं। साथ ही बदल रही है शहर की आर्थिकी और जीवन जीने का तरीका। इसके साथ ही युवा पीढ़ी के सपने और लक्ष्य बदल रहे हैं। अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए सबसे पहले विकास आता है, विकास भौतिक ही नहीं होता, बल्कि मानसिक भी होता है।

इस बेहतरीन इन्फ्रा के नीचे बड़े संदेश देने वाले चित्र उकेरे गए हैं, जिनमें महांत दिग्विजयनाथ जी से लेकर शिवाजी और अमर बलिदानी भगत सिंह तक के चित्र उकेरे गए हैं। अब यह बतौर नागरिक हमारा कर्तव्य है कि इनकी सुंदरता को न बिगाड़ें और इस विश्वस्तरीय इन्फ्रा को सहेजकर रखें। इसके साथ ही व्यापार-उद्यम की दिशा में हम तेजी से बढ़ें, यही मनोकामना है, यही विश्वास है।