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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 27, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chhath Puja 2022: रामगढ़ताल के किनारे व मोहल्लों में बनाई जा रही वेदी, राप्ती नदी के किनारे भक्तों ने बनाई जगह

By Jagran NewsEdited By: Pragati Chand
Published: Thu, 27 Oct 2022 12:26 PM (IST)

Chhath Puja 2022 छठ महापर्व को लेकर शहर से गांव तक तैयारियां शुरू हो गई है। महिलाएं खरीदारी करने में ...और पढ़ें

रामगढ़ताल के किनारे वेदी बनातीं युवतियां। -जागरण
रामगढ़ताल के किनारे वेदी बनातीं युवतियां। -जागरण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। Chhath Puja 2022: गोरखपुर शहर के मोहद्दीपुर में रामगढ़ ताल के किनारे छठ पूजा के लिए वेदियों का निर्माण शुरू हो गया है। कोई वेदी का निर्माण कर रहा तो कोई कुदाल से अपनी आरक्षित जगह को समतल। रेखा, रजनी व आशा वेदी बना रही थीं तो रामभजन कुछ दूर पर गंदगी साफ कर रहे थे। राप्ती नदी के राजघाट पर अभी पानी व कीचड़ है। इसलिए वहां वेदियों का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। लेकिन श्रद्धालुओं ने रस्सी से घेरकर अपनी जगह आरक्षित कर ली है। रामगढ़ ताल, महेसरा ताल समेत विभिन्न मोहल्लों, कालोनियों व मंदिर परिसरों में घाट बनाए जा रहे हैं। उत्सव व उल्लास का माहौल है। श्रद्धालु पूरे मनोयोग से तैयारियों में जुटे हैं।

पूजा की तैयारियां शुरू

छठ पर्व का सायंकालीन अर्घ्य रविवार व उदयकालीन अर्घ्य सोमवार को दिया जाएगा। पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां बाजार सज गया है, वहीं दूसरी तरफ घाटों पर तैयारी शुरू हो गई है। राप्ती नदी के किनारे नगर निगम ने सफाई शुरू करा दी है। बुधवार को जेसीबी से कीचड़ हटाया गया। इसके अलावा शंकरघाट, विष्णु मंदिर, बिछिया, खरैया पोखरा, शाहपुर, मालवीय नगर, अभिषेक नगर, विलंदपुर, जगन्नाथपुर, रामगढ़ताल व महेसरा ताल आदि स्थानों पर वेदियों का निर्माण शुरू हो चुका है।

नहाय-खाय से 28 को शुरू होगा छठ पर्व

सूर्योपासना का पर्व छठ 28 अक्टूबर को नहाय-खाय से शुरू होगा। 29 को खरना है। 30 अक्टूबर को छठ व्रत के दिन व्रती निर्जल व्रत रहेंगे। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर मंगल कामना करेंगे। व्रत की पूर्णाहुति 31 अक्टूबर को उदयकालीन सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगी। इसके बाद व्रती पारण करेंगे।

क्या कहते हैं ज्योतिष

पं. शरदचंद्र मिश्र ने बताया कि सूर्यषष्ठी व्रत अनेक पौराणिक व लोक कथाओं से गुंथा हुआ है। सभी कथाएं इसके महत्व पर प्रकाश डालती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार द्रोपदी ने छठ पूजा कर राज्यविहीन हो चुके पांडवों को राज्य दिलाया तो सुकन्या, अंधे हो चुके अपने पति की आंखें वापस पाकर धन्य हुई।