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रोज वैली घोटाले में एक्शन, CBI ने UP पुलिस से मांगा दर्ज मुकदमों का हिसाब

Published: Sat, 24 Oct 2026 08:04 AM (IST)

सीबीआइ ने रोज वैली चिटफंड घोटाले की जांच के तहत उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से कंपनी और उसके शीर्ष ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. सीबीआइ ने रोज वैली घोटाले में यूपी से मांगे मुकदमे के ब्योरे।

  2. कंपनी और तीन शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ जांच जारी है।

  3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2014 से सीबीआइ कर रही जांच।

सतीश पांडेय, गोरखपुर। रोज वैली चिटफंड घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से कंपनी और उसके तीन शीर्ष पदाधिकारियों के विरुद्ध दर्ज मुकदमों का ब्योरा मांगा है। पुलिस को तीन दिन के भीतर जानकारी देनी होगी कि रोज वैली ग्रुप आफ कंपनीज, उसके अध्यक्ष गौतम कुंडू, प्रबंध निदेशक शिबामाय दत्ता और निदेशक अशोक कुमार साहा के खिलाफ प्रदेश के किसी थाने में मुकदमा दर्ज है या आरोप पत्र दाखिल किया गया है। यह जानकारी ओडिशा हाई कोर्ट में चल रहे एक मामले के सिलसिले में जुटाई जा रही है।

सीबीआइ की आर्थिक अपराध शाखा, कोलकाता के पुलिस अधीक्षक बी. कृष्णा राव ने पत्र भेजकर जानकारी मांगी है। पत्र के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के नौ मई 2014 के आदेश पर बंगाल और ओडिशा में सक्रिय चिटफंड कंपनियों की सीबीआइ जांच कर रही है। इसी क्रम में ओडिशा पुलिस के तीन मुकदमों की जांच अपने हाथ में लेकर सीबीआइ ने रोज वैली ग्रुप के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान आम लोगों से धोखाधड़ी और छल-कपट के जरिये धन जुटाने तथा उसके गबन के आरोप में कंपनी के अध्यक्ष गौतम कुंडू, प्रबंध निदेशक शिबामाय दत्ता और निदेशक अशोक कुमार साहा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं।

अब सीबीआइ यह पता लगा रही है कि उत्तर प्रदेश में भी कंपनी या उसके शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं या नहीं। पुलिस मुख्यालय से पत्र आने के बाद गोरखपुर समेत आसपास के जिलों में इस मामले से जुड़े तथ्य की पड़ताल चल रही है।

क्या था रोज वैली चिटफंड घोटाला
रोज वैली समूह ने जमीन की बुकिंग, होटल में निश्चित अवधि तक ठहरने का अधिकार और दूसरी निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों से रकम जुटाई। निवेशकों को तय अवधि पूरी होने पर रकम और आकर्षक रिटर्न देने का भरोसा दिया जाता था। इसके लिए एजेंटों का नेटवर्क बनाया गया, जिन्हें कमीशन और प्रोत्साहन देकर लोगों से निवेश कराने के लिए लगाया गया।

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आरोप है कि समूह ने नियमों का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर लोगों से जमा राशि जुटाई और रकम का एक हिस्सा अपनी दूसरी कंपनियों में स्थानांतरित किया। कई निवेशकों को उनकी जमा रकम वापस नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआइ ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सक्रिय चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू की।

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