गोरखपुर, नवनीत प्रकाश त्रिपाठी। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में बीते शुक्रवार को हुए बवाल में बाहरियों की भूमिका का सवाल पहले दिन से उठ रहा है। प्रदेश सरकार भी इस सवाल को लेकर बेहद गंभीर है, इसलिए शासन ने बवाल में बाहरियों की भूमिका तलाश करने की जिम्मेदारी एसटीएफ को सौंपी है। एसटीएफ की गोरखपुर इकाई यहां हुए बवाल में बाहरियों की भूमिका का पता लगा रही है। जनपद पुलिस भी अपने स्तर से इसकी जांच कर रही है। बताते हैं कि बवाल के दिन उपद्रव प्रभावित इलाके में काम रहे कई संदिग्ध नंबर चिह्नित भी किए गए हैं। एसटीएफ और जिला पुलिस उन नंबरों का कॉल डिटेल और मैसेज जुटाकर बाहरियों की भूमिका के सवाल का जवाब ढूंढने में जुटी है।

बाहरी लोगों के बवाल करने की आशंका

20 दिसंबर को जामा मस्जिद में दोपहर की नमाज के बाद शहर का माहौल बिगड़ गया था। उग्र भीड़ ने कोतवाली इलाके में मदीना मस्जिद के पास जहां नागरिक सुरक्षा कोर के दो स्वयंसेवकों पर हमला कर दिया था, वहीं कोतवाली थाने के बिल्कुल पास नखास चौराहे पर अचानक आई भीड़ ने पुलिस पर पर पथराव शुरू कर दिया था। इससे पहले अन्य शहरों में भले ही इस कानून के विरोध में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे लेकिन गोरखपुर में इसको लेकर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं थी। शुक्रवार को अचानक शुरू हुए विवाद के बाद इसके पीछे बाहरियों का हाथ होने की आशंका जताई गई थी।

बवाल के दिन बाहरियों के मौजूद होने की थी रिपोर्ट

शुक्रवार को बवाल शुरू होने से पहले ही एलआइयू ने कोतवाली क्षेत्र के शाहमारूफ और जामा मस्जिद के पास कुछ बाहरी तत्वों के सक्रिय होने और लोगों को उपद्रव के लिए भड़काने की रिपोर्ट दी थी। शुक्रवार दोपहर में नमाज के बाद पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की तैयारी की थी, लेकिन इससे पहले ही हालात बिगड़ गए थे। बवाल के बाद शुरू हुई छानबीन में दूसरे शहरों से फोन कर और वाट्सएप ग्रुप तथा अन्य सोशल मीडिया के जरिए यहां के युवकों को मैसेज भेजकर उपद्रव के लिए भड़काने के भी संकेत मिले हैं। 21 दिसंबर को खाड़ी देश से अज्ञात व्यक्ति ने एक पुलिस अधिकारी को इंटरनेट कॉल कर गोरखपुर में दंगा कराने के लिए चंदा जुटाए जाने की जानकारी दी थी। दो अज्ञात लोगों ने उसी अधिकारी को फोन कर राजस्थान और मध्यप्रदेश से कुछ युवकों के दंगा कराने के लिए गोरखपुर पहुंचने की सूचना दी थी।

लखनऊ और शामली में बाहरी तत्वों ने ही भड़काई थी हिंसा

गोरखपुर में बवाल कराने में बाहरी तत्वों का हाथ होने की आशंका के बीच शामली और लखनऊ में भड़की ङ्क्षहसा के बाद पीएफआइ (पापुलर फ्रंट आफ इंडिया) के 14 सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। लखनऊ पुलिस ने पीएफआइ के स्टेट प्रेसिडेंट वसीम अहमद और ट्रेजरार नदीम सहित तीन को गिरफ्तार किया है। इससे पहले शामली में दंगा भड़काने के आरोप में इसी संगठन के 11 सदस्य गिरफ्तार किए गए थे। जांच में ङ्क्षहसा भड़कने में उनकी भूमिका होने के ठोस प्रमाण मिले हैं। माना जा रहा है कि सीएम सिटी होने की वजह से गोरखपुर, उपद्रवियों के निशाने पर था। हालांकि समय रहते बवाल पर पुलिस के काबू कर लेने से अपने मंसूबे में वे कामयाब नहीं हो पाए।

सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। बवाल कराने की साजिश जिसने भी रची है, उसके विरुद्ध कार्रवाई होनी तय है। - दावा शेरपा, एडीजी जोन

Posted By: Pradeep Srivastava

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