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गोरखपुर, जेएनएन। गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुई शिक्षकों की नियुक्तियों में गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ रहा है। गोरखपुर विश्वविद्यालय कार्य परिषद के सदस्य प्रो. राम अचल सिंह के बाद अब भाजपा विधायक डाक्‍टर राधा मोहन दास अग्रवाल मुखर हुए हैं। भाजपा विधायक ने राज्‍यपाल को पत्र लिखकर नियुक्तियों की गहनता से जांच की मांग की है।

नगर विधायक डाक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल ने राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल तथा प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तथा उच्च शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुई शिक्षकों की नियुक्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा भविष्य में विश्वविद्यालय उच्चस्तरीय शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से नियुक्तियां करने की मांग की है।

विधान सभा में उठेगा मामला

विधायक कहा कि विधानसभा के आगामी सत्र में इस विषय पर चर्चा करायेंगे। इससे पहले नगर विधायक से विगत दिनों गोरखपुर विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्य प्रोफेसर राम अचल सिंह ने मुलाकात करके विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाये थे। प्रोफेसर सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी हैं और अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। नगर विधायक ने उनके पत्र को अपने फेसबुक पर शेयर करके नागरिकों की टिप्पणी आमंत्रित की थी। नागरिकों की टिप्पणियां मिलने के बाद विधायक ने प्रो. सिंह के पत्र पर कार्यवाही आगे बढ़ा दिया।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

नगर विधायक ने राज्यपाल को लिखा है कि शिक्षक विश्वविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था के प्राण होते हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता, उनका व्यक्तित्व और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा हमेशा प्रामाणिक होनी चाहिए और किसी भी प्रकार के आरोप से परे होनी चाहिए, क्योंकि शिक्षक सिर्फ अपने ज्ञान से नहीं बल्कि अपने आचरण तथा व्यक्तित्व से शिक्षा देता है। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि यदि शिक्षकों की इस अत्यंत महत्वपूर्ण छवि पर किंचित आरोप भी लगे तो शिक्षा के व्यापक उद्देश्य यह अपेक्षा करते हैं कि उन आरोपों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें छात्र-छात्राओं और समाज के सामने पाक-साफ सिद्ध किया जाये।

 

पूर्व में भी नियुक्तियों पर उठे हैं सवाल

नगर विधायक ने लिखा है कि कई विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर सामान्यतः बहुत आरोप लगते हैं, जिनमें जातीयता, भाई भतीजावाद, आर्थिक तथा कतिपय अन्य तरह के भ्रष्टाचार मुख्यतः शामिल हैं। विगत दिनों चन्द्रशेखर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति पर ऐसे अत्यंत गम्भीर आरोप लगे थे। नगर विधायक ने आगे लिखा है कि उनके पास इन विवादास्पद नियुक्तियों को लेकर प्रत्यक्ष रूप से कोई जानकारी नहीं है। हालांकि जन सामान्य में नियुक्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर सामान्यतः बहुत सी चर्चाएं स्थापित हैं और दूसरा तथ्य यह भी है कि एकाध को छोड़कर अधिकांश शिक्षकों ने अपना कार्यभार ग्रहण भी कर लिया है। लेकिन प्रो सिंह के असंदिग्ध व्यक्तित्व को देखते हुए वे इस पत्र को कार्यवाही के लिये भेज रहे हैं।

विश्वविद्यालय उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन हो

नगर विधायक ने मांग किया है कि प्रदेश के महाविद्यालयों में प्राचार्यो तथा शिक्षकों की नियुक्तियां उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाती है। राज्यपाल यदि चाहें तो विश्वविद्यालय अधिनियम में आवश्यक संशोधन करके विश्वविद्यालय की नियुक्तियां इस आयोग के द्वारा भी कराई जा सकती है अथवा इसके लिये एक स्वतंत्र एवं स्वायत्त विश्वविद्यालय उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग का भी गठन किया जा सकता है। डाक्‍टर राधा मोहन ने कहा है कि भ्रष्टाचार रहित शासन-प्रशासन के प्रति भारत के प्रधानमंत्री की दृढ़-प्रतिज्ञ सोच को देखते हुए यह अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाये रखने के लिये राज्यपाल ऐसा करने पर गम्भीरता से विचार करें।

Posted By: Pradeep Srivastava

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