गोरखपुर, जेएनएन। रेलकर्मियों और उनके स्वजन के लिए राहत भरी खबर है। अब संक्रमित होने या स्थिति गंभीर होने पर ललित नारायण मिश्र केंद्रीय रेलवे अस्पताल के कोविड लेवल- टू सेंटर में ही उनका समुचित इलाज हो जाएगा। उन्हें उपचार के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। संक्रमितों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने 25 बेड के कोविड सेंटर को 65 बेड का बना दिया है।

इसके अलावा अलग से एक सस्पेक्टिव वार्ड भी तैयार कर दिया है। जिसमें सस्पेक्टिव निगेटिव रेलकर्मियों का उपचार किया जा रहा है। दैनिक जागरण ने 11 मई के अंक में अपने नियमित कालम मुसाफिर हूं यारों में रेलवे अस्पताल में संक्रमित रेलकर्मियों के उपचार में आ रही दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया था।

दिल्ली से पहुंची 10 नई आक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन, कार्य करने लगे वेंटिलेटर

जानकारों के अनुसार आक्सीजन की कमी को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने आक्सीजन कंसंट्रेटर मशीनें भी मंगा ली हैं। मंगलवार को दस नई मशीनें दिल्ली से रेलवे अस्पताल पहुंची। ऐसे में अब आक्सीजन की कमी नहीं होने पाएगी। आक्सीजन सिलेंडर की अनुपलब्धता पर ही भी संक्रमितों को संजीवनी मिलती रहेगी। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह के अनुसार पुरानी कंसंट्रेटर मशीनें भी काम कर रही हैं। आक्सीजन की नियमित आपूर्ति के लिए जिला प्रशासन से समन्वय बना हुआ है। मरीजों को पाइप लाइन और आक्सीजन सिलेंडर के माध्यम से आक्सीजन दी जा रही है। वेंटिलेंटर भी कार्य कर रहे हैं। 

नहीं होगी आक्सीजन की कमी, आवश्यकता पड़ने पर मिलती रहेगी संजीवनी

कोविड सेंटर में 60 से 65 संक्रमित का इलाज तो चल ही रहा है, 15 से 20 कोविड सस्पेक्टिव निगेटिव मरीजों का भी उपचार किया जा रहा है। दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। संक्रमित रेलकर्मियों और उनके स्वजन को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा रही है। कोविड सेंटर में भर्ती लोग ठीक होकर अपने घर जाने लगे हैं। इसके अलावा होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमितों को मोबाइल और वाटसएप के माध्यम से आवश्यक सलाह भी दिए जा रहे हैं। कोविड सेंटर में प्रत्येक आठ घंटे के शिफ्ट में संबंधित स्टाफ कार्य कर रहा है।

आक्सीजन जनरेटिंग प्लांट लगाने की भी शुरू हुई तैयारी

रेलवे प्रशासन ने रेलवे अस्पताल और यांत्रिक कारखाने में आक्सीजन जनरेटिंग प्लांट लगाने की तैयारी भी शुरू क दी है। आक्सीजन प्लांट लग जाने से आने वाले दिनों में रेलवे की दूसरे संस्थानों पर आक्सीजन की निर्भरता समाप्त हो जाएगी। आक्सीजन के मामले में भी रेलवे आत्मनिर्भर हो जाएगा। रेलवे बोर्ड ने आक्सीजन जनरेटिंग प्लांट के लिए महाप्रबंधकों को वर्ष 2021-22 में अधिकतम दो करोड़ रुपये तक खर्च करने का अधिकार दे दिया है।

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