गोरखपुर, जागरण संवाददाता। उद्यमियों की ओर से बैंकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के बाद जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि सरकारी योजनाओं में आवेदन के एक महीने के भीतर यदि मामले का निस्तारण नहीं हुआ तो इसे शोषण माना जाएगा। इसी तरह ऋण स्वीकृति के एक महीने के भीतर यदि खाते में धनराशि नहीं गई तो यह भी शोषण के दायरे में आएगा। लीड बैंक मैनेजर को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं और बैंकों को जिलाधिकारी की ओर से पत्र भी लिखा जा रहा है। बैंकों में आए एवं निस्तारित हुए आवेदनों पर प्रशासनिक अधिकारी भी नजर रखेंगे। समय से निस्तारण नहीं हुआ तो कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।

ऋण स्वीकृति के एक सप्ताह में खाते में नहीं गई धनराशि तो माना जाएगा शोषण

मंडलीय उद्योग बंधु एवं जिला उद्योग बंधु की बैठक में उद्यमियों की ओर से सर्वाधिक मामले बैंकों की कार्यशैली को लेकर उठाए गए थे। उद्यमियों का कहना था कि अनावश्यक रूप से फाइल को लंबित रखा जाता है। सर्वाधिक परेशानी नए उद्यमियों को होती है। इसी तरह एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में भी फाइलों को लंबित रखा जाता है। समय से उसका निस्तारण नहीं किया जा रहा है। कई मामलों में स्वीकृति मिलने के बाद भी ऋण मिलने में देरी होती है। उद्यमियों की ओर से मामला उठाने के बाद जिलाधिकारी ने कार्यशैली में बदलाव लाने का निर्देश दिया है।

सरकारी योजनाओं की यह है स्थिति

ओडीओपी में जुलाई महीने तक उद्योग विभाग की ओर से 51 आवेदन बैंकों को भेजे गए हैं। ये आवेदन साक्षात्कार व प्रपत्रों की जांच करने के बाद भेजे जाते हैं। माना जाता है कि इन फाइलों में सभी जरूरी दस्तावेज लगे होते हैं। पर, अभी तक बैंकों ने इनमें से 14 आवेदन पत्र ही स्वीकृत किए हैं। पांच आवेदन पत्रों पर मार्जिन मनी (सब्सिडी) वितरित की गई है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 84 आवेदन पत्र बैंकों को भेजे गए हैं और अभी तक 15 ही स्वीकृत हैं। केवल पांच में मार्जिन मनी वितरित की गई है।

बैंकों की कार्यप्रणाली को लेकर उद्यमियों की ओर से नाराजगी जताई गई है। लीड बैंक मैनेजर को निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन का निस्तारण कर दें। ऐसा न करने पर शोषण माना जाएगा और कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। - विजय किरण आनंद, जिलाधिकारी।

Edited By: Pradeep Srivastava