गोरखपुर, जेएनएन। लगातार हुई बारिश के कारण केले के फसल को सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ है। गोरखपुर-बस्‍ती मंडल में केले के किसान इससे काफी चिंतित हैं। इसमें सर्वाधिक नुकसान कुशीनगर जनपद में केले के किसानों को हुई है। लॉकडाउन के कारण खेती में नुकसान झेले किसानों को बारिश ने कहीं का नहीं छोड़ा है। जगह-जगह खेतों में केले की फसल गिरी पड़ी है। किसानों को कुछ सूझ नहीं रहा है कि क्या करें? सभी तहसील क्षेत्रों में धान, सब्जी व केले की फसलों की भारी बर्बादी हुई है। किसान खेतों में जाकर बर्बाद हुई फसलों को निहारने के साथ अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। बातचीत में सभी यही कह रहे हैं कि इस बार प्रकृति भी उनसे रूठी हुई है।

किसानों की समस्या उनकी जुबानी

राजा पाकड़ गांव निवासी किसान बृजेश राय का कहना है कि इस बार कई वर्षों बाद ऐसी बारिश हुई है। लगभग दो बीघा सरयू 52 प्रजाति का धान का बीज बोया था, फसल पक कर तैयार है। खेत में पानी भरने से कटाई संभव नहीं है। सब बर्बाद हो जाएगा। इससे आर्थिक दिक्कत खड़ी हो जाएगी। वहीं के नगीना गुप्ता का कहना है कि खेत में धान पक कर तैयार है। एक-दो दिन में कटवाकर घर लाने की तैयारी थी, लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया। फसल खेत में ही गिर गई। मौसम  ऐसा है कि अब उसके उठने की संभावना भी कम है। छितौनी गांव निवासी किसान विवेक गुप्‍ता का कहना है कि लो लैंड में बाई गई धान की फसल तो बिल्कुल नहीं बची। जगह-जगह केला भी खेतों में गिरा पड़ा है। गन्ना भी जलजमाव से बर्बाद हो रहा है। इसी तरह बारिश होती रही तो गन्ने की फसल को बचाया नहीं जा सकता है। जबकि सिसवा महंथ गांव निवासी संतोष चौरसिया का कहना है कि फसलों की भारी क्षति हुई है। अब सरकार को राजस्व कर्मियों को लगाकर क्षति का आकलन कर मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए। अन्न का उत्पादन कर ही किसान अपने घर का खर्च चलाता है, इस वर्ष वह बर्बाद हो गया है।

किसानों ने की सर्वे कराकर फसल का मुआवजा दिलाने की मांग

जोकवा बाजार के किसान उदयभान यादव का कहना है कि पहले खेती को कोरोना संक्रमण ने प्रभावित किया और अब प्रकृति की मार झेलनी पड़ रही है। अध्यधिक बारिश होने के कारण किसान कहीं का नहीं रह गया है। पक कर तैयार धान की फसल खेत में ही गिर गई है। वहीं के मधुसूदन यादव, नथुनी प्रजापति और कुबेर स्‍थान के राम प्रकाश मिश्र का कहना है कि बारिश ने किसानों की नींद उड़ा दी है। गन्ना में रोग लग जाने से सूख गया। आस थी कि धान की फसल किसानों का साथ देगी, लेकिन बारिश व हवा ने इसे भी साफ कर दिया। छोटे रकबा वाले किसानों को खाने के लाले पड़ जाएंगे। कोरोना संक्रमण के समय प्रवासी मजदूर गांव आ गए। वह यहीं पर खेती व मजदूरी कर जीविकोपार्जन करने का निर्णय भी ले लिए। लेकिन यहां भी उनको परेशानियां ही झेलनी पड़ रही है। बारिश व हवा ने उनकी इस आस पर पानी फेर दिया। सरकार फसलों की क्षति का आकलन कराए और मुआवजा दे। सब्जी से लेकर धान, गेहूं, गन्ने की फसलों की भारी बर्बादी हुई है। इस बात की खेती में किसानों की पूंजी डूब गई है। सरकार कारगर उपाय करे।

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