गोरखपुर, जेएनएन। शहर में नागरिकों के सामने क्या समस्याएं है? इनसे कैसे निपटा जा सकता है? शहर में चिकित्सीय सुविधा का दायरा क्या है? अत्याधुनिक चिकित्सीय सुविधा के मानक पर अपना शहर कितना खरा उतर रहा है? ये कुछ ऐसे महत्वपूर्ण सवाल हैं, जिसका जवाब तलाशने के लिए जागरण ने आयुष्मान भारत-2019 सिटी कॉन्क्लेव का आयोजन किया। आयोजन में वक्ता के तौर पर शामिल हुए शहर के मशहूर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हर सवाल का माकूल जवाब दिया। साथ ही सवालों से जुड़े श्रोताओं की जिज्ञासा को भी बखूबी शांत किया।

अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणाली से लैस है गोरखपुर

परिचर्चा के क्रम में सभी डॉक्टर एक बात को लेकर एकमत नजर आए कि आज की तिथि में गोरखपुर अत्याधुनिक चिकित्सा प्रणाली से लैस है। इलाज के लिए बड़े शहरों की तरफ रुख करने की जरूरत नहीं, जरूरत है तो अपने शहर की चिकित्सीय सुविधा और डॉक्टरों पर भरोसा करने की। परिचर्चा के क्रम में सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपने-अपने क्षेत्र की शहर में अत्याधुनिक सुविधाओं की जानकारी भी श्रोताओं को दी।

जागरूकता की कमी से पैदा हो रही है समस्‍या

आयोजन की शुरुआत परिचर्चा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए विशेषज्ञ चिकित्सकों को पौधा भेंट कर हुई। संचालन कर रहीं आकृति विज्ञा अर्पण ने आयोजन की औचित्य की जानकारी देने के बाद सबसे पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरहीता करीम को संबोधन के लिए आमंत्रित किया। डॉ. सुरहीता का कहना था कि सेहत की दुरुस्तगी के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है मरीज का इसे लेकर जागरूक रहना। आधी समस्याएं जागरूकता की कमी से आ रही हैं।

दूरबीन विधि से आसान हुई सर्जरी

दंत व मुख रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव गुलाटी ने श्रोताओं का यह भ्रम दूर किया कि टूथपेस्ट से दांत मजबूत होता है। उन्होंने टूथब्रश के मुलायम होने पर जोर दिया। सर्जन डॉ. शिवशंकर शाही सर्जरी की लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने में काफी हद तक सफल हुए। उन्होंने कहा कि दूरबीन विधि से सर्जरी काफी आसान और ज्यादा सटीक हो गई है। लोगों को इसपर विश्वास जमाना होगा। कैंसर विशेषज्ञ डॉ. एके चतुर्वेदी ने कैंसर को लेकर न केवल लोगों की भ्रांतियां दूर कीं बल्कि उससे बचे रहने के उपाय भी बताए।

मिर्गी, फालिज पर सतर्कता की जरूरत

आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. इमरान अख्तर ने बताया कि अब कुल्हा प्रत्यारोपण, जोड़ प्रत्यारोपण भी गोरखपुर में धड़ल्ले से हो रहे हैं। बड़े शहरों की सुविधा शहर में ही मौजूद है। न्यूरो फिजिशियन डॉ. दुर्गेश गुप्ता ने मिर्गी और फालिज को लेकर न केवल लोगों की गलतफहमी दूर की बल्कि इसे लेकर सतर्कता बरतने की सलाह भी दी। अंत में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजना बागची ने डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद की कमी को दूर करने को लेकर अपने विचार लोगों से साझा किए।

कार्यक्रम में यह भी रहे मौजूद

आभार ज्ञापन दैनिक जागरण गोरखपुर के संपादकीय प्रभारी जितेन्द्र त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर दैनिक जागरण के सहायक महाप्रबंधक प्रवीण कुमार, प्रसार प्रबंधक डा.राजेश यादव, विज्ञापन प्रबंधक रमेश यादव, सीनियर मैनेजर एकाउंट अरुण कुमार श्रीवास्तव, राष्ट्रीय इंटर कालेज के प्राचार्य राजेश गौतम, अरुण कुमार बलानी, प्रेम जालान, आलोक रंजन वर्मा, अनिल मिश्रा, मित्र प्रकाश, रीना जायसवाल, डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव, डॉ. रंजना वर्मा, सत्य प्रकाश आदि मौजूद रहे।

नियमित चेकअप कराएं, सुविधाओं का फायदा उठाएं

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरहीता करीम ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या मरीजों और उनके परिजनों में रोग के प्रति जागरूकता की कमी है। गंभीर से गंभीर मरीज की जरूरत के अनुसार शहर में चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। नियमित हेल्थ चेकअप पर महिलाओं को विशेष ध्यान देना होगा, खासकर गर्भवती महिलाओं को। एक बात जरूर करना चाहूंगी कि गरीब से गरीब इलाज करा सके, इसके लिए सरकार को जीडीपी में स्वास्थ्य खर्च की भागीदारी बढ़ानी होगी।

कोई डॉक्टर मरीज को नहीं मारता

कैंसर के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार बढ़ता प्रदूषण और खैनी व गुटखे का प्रयोग है। कैंसर को कम करना है तो इसपर काबू करने की फुलप्रूफ योजना बनानी होगी। जहां तक रही इलाज की बात तो अब गोरखपुर में भी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मरीजों को कैंसर की आशंका के साथ ही तत्काल इलाज शुरू कर देना चाहिए। स्थानीय डाक्टर पर भरोसा करें। यह जान लें कि कोई डॉक्टर अपने मरीज को नहीं मार सकता। - डॉ. एके चतुर्वेदी, कैंसर विशेषज्ञ

इसलिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं

ज्यादातर लोगों को यह गलतफहमी रहती है कि टूथब्रश दातों को मजबूत करते हैं। मैं स्थिति को साफ कर देना चाहता हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है। दातों को दुरुस्त रखने में ब्रश की भूमिका ज्यादा है। ब्रश मुलायम होने चाहिए, वरना वह मसूड़ों को चोटिल कर देते हैं। दांत और मुख के इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं गोरखपुर में मौजूद हैं, वह भी कम कीमत पर। इसलिए इसके लिए कही बाहर जाने की जरूरत नहीं। - डॉ. राजीव गुलाटी, दंत व मुख रोग विशेषज्ञ

मरीज को ठीक होते देखना चाहता है हर डॉक्टर

मैं मानती हूं कि मरीजों की अधिकता की वजह से कई बार मरीज और डॉक्टर के बीच संवाद में कमी रह जाती है। लेकिन इसका यह मतलब यह हरगिज नहीं होता कि डॉक्टर मरीज के साथ कोई लापरवाही कर रहा है। हर डॉक्टर अपने मरीज को ठीक होते देखना चाहता है। मरीज को अपने डॉक्टर पर विश्वास करना चाहिए। हर डॉक्टर अपना बेस्ट करने की कोशिश करता है। मरीज को भी यह समझना चाहिए। - डॉ. रंजना बागची, स्त्री रोग विशेषज्ञ

अब तो यहां मिनिमम ब्लड लॉस पर मैक्सिमम सर्जरी

सर्जरी को लेकर लोगों में काफी भ्रांति है। इस भ्रांति को दूर करना होगा। अब सर्जरी पूरी तरह से साफ्टवेयर बेस्ड हो गई है। कम से कम समय में सटीक से सटीक सर्जरी ऐसा होने पर ही संभव हो पाई। मैं सबको इसे लेकर जागरूक करता रहता हूं कि अब सर्जरी से डरें नहीं। गोरखपुर भी सर्जरी की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हो चुका है। अब तो मिनिमम ब्लड लॉस पर बड़ी से बड़ी सर्जरी हो जाती है।  - डॉ. शिव शंकर शाही, सर्जन

लाइलाज नहीं हैं मिर्गी और फालिज

लोग न्यूरो के रोग को छिपाने की कोशिश करते हैं। खासकर मिर्गी और फालिज को। इसे लेकर किसी तरह का भ्रम पालने की जरूरत नहीं। आज की तिथि में दोनों का इलाज संभव है। ब्रेन स्ट्रोक को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। ब्लड प्रेशर और मधुमेह साइलेंट किलर हैं। इसे लेकर कोई लापरवाही हरगिज न करें। एक बात और, न्यूरो और मनोरोग के बीच अंतर को समझना होगा। - डॉ. दुर्गेश गुप्ता, न्यूरो फिजिशियन

छोटे चीरे से हो रहे बड़े ऑपरेशन

हड्डी रोग में इलाज को लेकर गोरखपुर की स्थिति काफी मजबूत हो चुकी है। बड़े से बड़े ऑपरेशन छोटे से छोटे चीरे के साथ हो रहे हैं। बड़े शहरों से कम कीमत पर गोरखपुर में बड़ा से बड़ा ऑपरेशन आज संभव है। अगर कुछ कमी है तो ट्रॉमा और आइसीयू की सुविधा की। कम होने की वजह से आज भी यह सुविधा खर्चीली है। लेकिन पूरा विश्वास है कि जल्द ही इस सुविधा का दायरा भी बढ़ेगा। - डॉ. इमरान अख्तर, आर्थोपेडिक सर्जन

परिचर्चा के बाद श्रोता बोले

ऐसे आयोजन से लोगों को अपने शहर में मौजूद सुविधाओं के बारे में जानकारी मिलती है। इलाज को लेकर शंकाओं का समाधान होता है। - प्रेम जालान, उद्योगपति

दवा के दाम और इलाज में आने वाले खर्च को लेकर मेरे मन में हमेशा तरह-तरह के सवाल उठते थे। इस आयोजन में सभी सवालों का जवाब मिल गया। - मित्र प्रकाश

दैनिक जागरण के माध्यम से शहर की मेडिकल सुविधाओं को जानने का अवसर मिला। अब यहां के लोगों को  इलाज के लिए बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं। - डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव

कैंसर की बीमारी से सासू मां चल बसीं। हम सब इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर लगाते रहे। यहां पर आकर पता चला कि अब अपने शहर में ही इलाज संभव है। - रश्मि सिंह

एक बात साफ हो गई कि बड़ी से बड़ी बीमारी के लिए गोरखपुर से बाहर जाने की जरूरत नहीं। इस आयोजन के बाद शहर की चिकित्सा व्यवस्था में विश्वास बढ़ा है। - डॉ. रंजना वर्मा

असली-नकली डॉक्टरों की पहचान को लेकर हर कोई चर्चा करता नजर आता है। परिचर्चा में पता चला कि सीएमओ आफिस से मिल सकती है असली डॉक्टर की सूची। - सत्यप्रकाश

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