गोरखपुर, जेएनएन। देवरिया जिले में एक ऐसा आगनबाड़ी केंद्र है जहां पर बेसहारा पशुओं का रैन बसेरा बना दिया गया है। सरकार एक तरफ बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए योजनाएं लागू कर सुपोषित करने में लगी है तो वहीं दूसरी तरफ विशुनपुरा में बच्चे बेसहारा पशुओं के बीच पढऩे को मजबूर हैं। बेसहारा पशुओं के कारण आगनबाड़ी केंद्र पर गंदगी का अंबार लगा है। हालत यह है कि अभिभावक भी अब अपने बच्चों को आगनबाड़ी केंद्र पर भेजने में हिचक रहे हैं।

देवरिया जिले में पथरदेवा विकास खंड के विशनपुरा गांव के पंचायत भवन में वर्षों से आंगनबाड़ी केंद्र चलता है। गांव में आंगनबाड़ी केंद्र खुला तो प्रधान ने पंचायत भवन में आगनबाड़ी केंद्र खुलवा दिया। यहां पर गांव के बच्‍चे आते रहे और पढ़ाई भी करते रहे।

आगनबाड़ी केंद्र में मौजूद हैं 40 बछड़े

वर्तमान में इस पंचायत भवन में बेसहारा पशुओं के लिए रैन बसेरा बना दिया गया। 40 बछड़े इस समय परिसर में विचरण कर रहे हैं। उन्हीं बछड़ों के बीच मासूम बच्चे रोज पढऩे आते हैं। चारो तरफ गंदगी फैली है। वहां रहना मुश्किल हो गया है।

बछड़ों के हमले में घायल हो चुके हैं कई बच्‍चे

कई बार बछड़ों के हमले से बच्चे घायल हो चुके हैं। अब तो अभिभावक अपने बच्चों को केंद्र पर भेजने से डर रहे हैं। केंद्र पर 25 बच्चों का नामांकन है। अगल-बगल के लोगों का कहना है कि कई बछड़े मर चुके हैं। जिनको नजदीक के पोखरे में ही फेंक दिया गया है।

अधिकारियों को दी गई है जानकारी

केंद्र प्रभारी अनिता राय बताती हैं कि अधिकारियों को अवगत कराया गया है। अभिभावक अपने बच्चों को केंद्र पर भेजने से कतरा रहे हैं। दूसरे केंद्र पर नामांकन करा लिया है। महज 10 से 12 बच्चे ही आ रहे हैं। पथरदेवा सीडीपीओ सुषमा दुबे ने बताया कि कई बार उच्चाधिकारियों को बताया गया लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उधर कार्यक्रम अधिकारी       

Posted By: Satish Shukla

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