गोरखपुर, जेएनएन। गोरखपुर शहर के साथ ही रेलवे की तस्वीर भी बदल रही है। नए वर्ष में ट्रेनों की लेटलतीफी दूर हो जाएगी। गोरखपुर जंक्शन पर गाडिय़ों का लोड कम हो जाएगा। पूर्वांचल के लोगों को गोरखपुर जंक्शन के विकल्प के रूप में एक नया कैंट सैटेलाइट स्टेशन मिल जाएगा। रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देश पर पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने कैंट स्टेशन का नव निर्माण कार्य तेज कर दिया है। मार्च तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

नया कैंट सैटेलाइट स्टेशन को टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां पांच प्लेटफार्म होंगे। वाशिंग पिट बनेगी। ट्रेनों की सफाई और धुलाई कैंट में ही जाएंगी। नरकटियागंज, छपरा और वाराणसी रूट पर चलने वाली लोकल (पैसेंजर, डेमू, इंटरसिटी आदि) ट्रेनें कैंट से ही बनकर चलेंगी। इस स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का भी विकास होगा। स्टेशन परिसर का विस्तार और सुंदरीकरण शुरू हो गया। स्टेशन प्रबंधन और आरपीएफ के लिए अलग से भवन बन रहा है। मुख्य द्वार चौड़ा बनेगा। पास में ही नई कालोनी बसाई जाएगी। बोर्ड ने निर्माण कार्य के लिए 32 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसमें वाशिंग पिट शामिल नहीं है।

दक्षिण में बनेगा गेट, एम्स से जोडऩे की तैयारी

रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुविधा के लिए कैंट स्टेशन पर दक्षिण तरफ गेट बनाने की तैयारी में है। रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के दक्षिण दस मीटर चौड़ी भूमि के लिए सेना को पत्र लिखा है। सेना मुख्यालय की हरी झंडी मिलते ही अहम प्रस्ताव पर कार्य शुरू हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि यह गेट एम्स के गेट से सीधे जोड़ा जाएगा।

क्रासिंग पर बनेगा आरओबी या आरयूबी, प्रस्ताव तैयार

कैंट स्टेशन का मुख्य द्वार उत्तर की तरफ है। ऐसे में शहर के लोगों को स्टेशन से पूरब स्थित रेलवे क्रासिंग पार करनी पड़ती है। क्रासिंग बंद हो जाने से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। अक्सर ट्रेनें छूट जाती हैं। हालांकि, नगर विधायक डा.राधा मोहन दास अग्रवाल ने इस समस्या के निदान के लिए रेलवे क्रासिंग पर रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) या रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है।

निर्माण कार्य चल रहा है। पूरा होने के बाद गोरखपुर जंक्शन का लोड कम हो जाएगा। राहत मिलेगी। - पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनई रेलवे

Posted By: Pradeep Srivastava

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