गोरखपुर, जेएनएन। आइपीएस अधिकारी अभिताभ ठाकुर के देवरिया में एसपी के रूप में तैनाती के दौरान उनकी पत्नी नूतन ठाकुर को औद्योगिक आस्थान में प्लाट आवंटित किए जाने के मामले की जांच होगी। आरटीआइ एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा की शिकायत पर शासन ने डीएम को जांच कराकर आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि आइपीएस अधिकारी अभिताभ ठाकुर देवरिया में 29 मार्च 1998 से लेकर नौ मार्च 2000 तक पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे।

यह लगे हैं आरोप

आरटीआइ एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने आरोप लगाया है कि तैनाती के दौरान उनकी पत्नी नूतन ठाकुर ने लाभ कमाने के लिए छद्म नाम से कूटरचित दस्तावेजों के सहारे औद्योगिक आस्थान में प्लाट आवंटित करा लिया। उन्होंने महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र को 29 जनवरी 1999 को नूतन देवी पत्नी अभिताभ ठाकुर ग्राम गौरा, जनपद सीतामढ़ी के नाम से प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप लगाया कि नूतन का यह कृत्य आपराधिक है। एसपी रहते अभिताभ ठाकुर ने इस मामले में कुछ नहीं किया। आरटीआइ एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने छह फरवरी को मुख्यमंत्री को लिखे शिकायती पत्र में कहा है कि उन्होंने 25 जनवरी को लखनऊ के गोमतीनगर थाने में व 31 जनवरी को लखनऊ के एसएसपी को तहरीर देकर एफआइआर दर्ज कराने की मांग की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस मामले में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल ने प्रमुख सचिव गृह को कार्रवाई करने को कहा है।

प्रमुख सचिव गृह के निर्देश पर गृह विभाग के अनु सचिव जयवीर सिंह ने 11 जुलाई को डीएम देवरिया को पत्र लिखकर एक सप्ताह में बिदुओं की जांच कराकर आख्या उपलब्ध कराने को कहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी अमित किशोर ने कहा कि इस संबंध में मुझे फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।

नूतन ठाकुर ने कहा-कोई पहचान नहीं छिपाया

आइपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पत्नी डा.नूतन ठाकुर ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा है कि मेरे पति अमिताभ ठाकुर ने डीएम अमित किशोर से फोन पर वार्ता कर प्रकरण की शीघ्र व निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है। हम स्वयं चाहते हैं कि इस प्रकरण की सत्यता सामने आए।

उन्होंने कहा कि मैंने 28 जनवरी 1999 को महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र देवरिया को प्लाट आवंटन के लिए आवेदनपत्र प्रस्तुत किया था। नियमानुसार ट्रेजरी चालान प्रस्तुत किया। 28 मार्च 1999 को पूर्व आवंटी के साथ महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र की उपस्थिति में ट्रांसफर डीड करवाया गया। खुद को कार्य करने में असमर्थ पाते हुए प्लाट वापसी के लिए आवेदन-पत्र दिया, जिस पर 13 जून 2002 को प्लाट अगले आवंटी को आवंटित कर दिया। समस्त प्रक्रिया पूरी तरह नियमसंगत थी। मैंने न तो यह प्लाट अपनी पहचान छिपा कर आवंटित करवाया था, न ही यह मेरी छिपी संपत्ति थी। मेरे पति ने इसे अपने वार्षिक संपत्ति विवरण में व मैंने भी अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाया था। प्लाट के आवंटन की प्रक्रिया में मेरा नाम नूतन देवी प्रयोग हुआ था, उस समय तक मैंने नियमित रूप से नूतन ठाकुर नाम का प्रयोग नहीं किया था। मेरे पति के नाम आदि में जो गलती हुई वह मात्र लिपिकीय त्रुटि थी। शिकायतकर्ता ने जानबूझ कर इन तथ्यों को तोड़मरोड़ कर शिकायत की।

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Posted By: Jagran

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