Nepal Flood: नारायणी नदी से बहकर कुशीनगर पहुंचे 11 शव गोरखपुर एम्स में सुरक्षित, अभी तक नहीं हो पाई पहचान
नेपाल त्रासदी के बाद नारायणी नदी में बहकर कुशीनगर पहुंचे 11 शवों को एम्स गोरखपुर में सुरक्षित रखा गया है। ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नेपाल में आई त्रासदी के बाद नारायणी नदी के बहाव में बहकर कुशीनगर जिले तक पहुंचे शवों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी एम्स गोरखपुर को दी गई है। रविवार को पांच और शव लाए गए।
शनिवार चार शव लाए गए थे। शवों की संख्या अब 11 हो गई है। सभी शवों को एनाटामी विभाग में सुरक्षित रखवाया गया है। शवों की पहचान और आगे की प्रक्रिया को लेकर एम्स प्रशासन, शासन के निर्देश की प्रतीक्षा कर रहा है।
शवों को सुरक्षित रखने के साथ एम्स प्रशासन उनकी पहचान में मदद करने के लिए प्रत्येक शव का विस्तृत विवरण भी तैयार कर रहा है।
इसमें शव की बाहरी स्थिति, शरीर के किसी हिस्से में सूजन, चोट अथवा सड़न जैसी स्थिति, बालों की लंबाई और पहने हुए कपड़ों समेत अन्य पहचान योग्य विवरण शामिल किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार कई शव लंबे समय तक पानी में रहने के कारण क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं। कुछ शवों की त्वचा छिली हुई है तो किसी के पैर में सूजन है। कुछ शवों के निचले हिस्से में सड़न भी शुरू हो गई है। कई शवों पर कपड़े नहीं हैं।
एम्स प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ा सवाल इन शवों की आगे की जांच और प्रक्रिया को लेकर है। शवों की पहचान के लिए किस तरह की जांच कराई जानी है और आगे उन्हें कहां भेजा जाएगा, इस संबंध में शासन से निर्देश मांगे जाने की तैयारी है। एम्स प्रशासन सोमवार को जिला प्रशासन के माध्यम से विदेश मंत्रालय से इस संबंध में संपर्क करेगा।

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मामला नेपाल की त्रासदी से जुड़ा होने के कारण शवों के संबंध में आगे की कार्रवाई शासन और विदेश मंत्रालय के निर्देश के अनुसार ही की जाएगी। नेपाल में लापता लोगों के स्वजन की ओर से पहचान का प्रयास भी किया जा सकता है। इसके लिए शवों से संबंधित सभी उपलब्ध विवरण सुरक्षित रखा जा रहा है।
शवों की जांच या प्रक्रिया के संबंध में अभी शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इसलिए हम शवों को सुरक्षित रखवाते जा रहे हैं, साथ ही उनका विस्तृत विवरण भी तैयार किया जा रहा है। शासन का जैसा निर्देश होगा उसी अनुरूप आगे की कार्यवाही की जाएगी।
-डा. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक एम्स
