गोरखपुर, जेएनएन। सिनेमाहाल या मल्टीप्लेक्स में खुले खाद्य या पेय पदार्थ बिके तो हाल मालिक कार्रवाई की जद में होंगे। दर्शक भी हाल के भीतर खाने व पीने के पैक सामान साथ ले जा सकेंगे। यह कानून अगस्त 2018 से प्रभावी है, लेकिन आलम यह है कि सिनेमाहालों में मनमानी पूरी तरह से हावी है। अब वाणिज्य कर विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला मजिस्ट्रेटों को पत्र के जरिए स्थिति साफ कर दी है।

जिलाधिकारियों को लिखा गया पत्र

गोरखपुर के आरटीआइ कार्यकर्ता आनन्द रूंगटा द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के बाद यह कदम उठाया गया है। सूबे के कमिश्नर वाणिज्य कर ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को दी जानकारी में उत्तर प्रदेश सिनेमाटोग्राफ नियमावली 1951 के प्रावधान का हवाला दिया है। बताया है कि प्रेक्षागृह के अंदर चाय, कॉफी, दूध, शीतल पेय या ऐसी कोई खाद्य सामग्री, जो मोहर बंद पैैकेट में न हो, के विक्रय की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रावधान को सख्ती से लागू करने के लिए सिनेमाहाल या मल्टीप्लेक्स का नियमित निरीक्षण कराने व अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई करने को भी कहा है।

डेढ़ साल में नहीं हुई कोई कार्रवाई

यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना चार नवंबर 2019 को जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में यह भी साफ कर चुके हैं कि वाणिज्य कर विभाग को इस संबंध में जांच करने का अधिकार है। लेकिन, तब से एक भी कार्रवाई नहीं हुई। बीते एक साल में कोई कार्रवाई नहीं होने की बात तो खुद विभाग ने भी स्वीकर किया है।

फिलहाल होता है यह

कानून होने के बावजूद सिनेमाहालों व मल्टीप्लेक्स में मनमानी चरम पर है। एक तो लोगों को बाहर से पैक खाद्य सामग्री भी हाल में ले जाने की अनुमति नहीं दी जाती, दूसरे अंदर खुले खाद्य पदार्थ मनमाने दाम पर बेचे जाते हैं। कोल्ड ड्रिंक, पॉप कार्न, पानी आदि की कीमत तीन से दस गुना तक वसूली जाती है।

मनमानी पर लगेगी रोक

इस संबंध में आरटीआइ कार्यकर्ता आनन्द रूंगटा का कहना है कि सिनेमाटोग्राफ नियमावली में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद सिनेमाहालों व मल्टीप्लेक्स में पैक खाद्य पदार्थ नहीं बेचे जाते। खुले सामान बेचकर मनमाना दाम वसूला जाता है। दर्शकों के बैग तक हाल के बाहर रखवा कर टोकन दे दिए जाते हैं। नया निर्देश जारी होने से इस मनमानी पर रोक लगेगी। एक आम नागरिक के अनुरोध को स्वीकार करके उसके पत्र पर कारगर कदम उठाने से यह जाहिर है कि यदि लोगों की कठिनाई को सही ढंग से रखा जाए तो कार्रवाई जरूर होती है।

Posted By: Satish Shukla

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